
अशोक यादव, लखनऊ : अंतरराष्ट्रीय फार्मास्युटिकल फेडरेशन (FIP) की घोषणा के अनुसार, 25 सितंबर को विश्व फार्मासिस्ट दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष की आधिकारिक थीम “Empowering pharmacists for healthier futures” (स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना) निर्धारित की गई है। इस अवसर पर फार्मासिस्ट फेडरेशन द्वारा शुक्रवार को लखनऊ स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में अपराह्न 2:30 बजे से एक विशाल वैज्ञानिक सेमिनार का आयोजन किया जाएगा।
दो प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञ होंगे मुख्य अतिथि
इस सेमिनार में मैक्स हॉस्पिटल (लखनऊ) के निदेशक डॉ. एच. एन. त्रिपाठी तथा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल चिकित्सालय के निदेशक एवं लखनऊ मंडल के अपर निदेशक डॉ. जी. पी. गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। सेमिनार में औषधि सुरक्षा, फार्माकोविजिलेंस, अस्पतालों में मेडिकेशन सेफ्टी और रोगी-केंद्रित सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत वैज्ञानिक चर्चा की जाएगी।
फार्मासिस्टों की भूमिका और रिक्त पदों का मुद्दा
विश्व फार्मासिस्ट दिवस की पूर्व संध्या पर फार्मासिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल के पूर्व चेयरमैन सुनील यादव ने सभी फार्मासिस्टों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि फार्मासिस्ट केवल दवा देने वाला कर्मी नहीं, बल्कि ड्रग काउंसलर और औषधि विशेषज्ञ है। उन्होंने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश में चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में लगभग 7,500 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 1,000 से अधिक पद वर्तमान में खाली चल रहे हैं।
प्रदेश में कुल 2.5 लाख पंजीकृत फार्मासिस्ट हैं। चिकित्सालयों में बढ़ते कार्यबोझ को देखते हुए कम से कम 10,000 पदों की आवश्यकता है। फेडरेशन की सरकार से मांग होगी कि स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए खाली पदों को तुरंत भरा जाए तथा फार्माकोविजिलेंस एवं क्लिनिकल फार्मासिस्ट के नए पदों का सृजन किया जाए।