कांग्रेस की मतदाताओं के EPIC और सीरियल नंबर में गड़बड़ी की शिकायत सही, जाँच आदेश के साथ ही दो एसडीएम हटाए गए

अशोक यादव, लखनऊ / लखीमपुर: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत की लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मामला सुर्खियों में आ गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग की जांच में EPIC नंबर से जुड़े विवरण में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। पूरनपुर के एसडीएम मयंक गोस्वामी और अमरिया के एसडीएम हेमंत चौधरी को हटाए जाने की सूचना है। वहीं, पीलीभीत सदर के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर (VRC) के ऑपरेटर को भी तत्काल हटाया गया है।

कांग्रेस ने इस मामले को उठाते हुए आरोप लगाया था कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के EPIC और सीरियल नंबर एक जैसे होने के बावजूद नामों में बदलाव किया गया। पार्टी का दावा है कि यह सामान्य तकनीकी त्रुटि का मामला भर नहीं, बल्कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। हालांकि, इन आरोपों के सभी पहलुओं और कथित गड़बड़ी के चुनावी प्रभाव की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है।

जीत का अंतर भी सवालों के घेरे में

इस मामले की राजनीतिक गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि पीलीभीत सदर सीट पर भाजपा प्रत्याशी संजय सिंह गंगवार की जीत का अंतर 6,970 वोट बताया गया है। कांग्रेस द्वारा उठाए गए 13,150 मतदाताओं से जुड़े कथित सवालों ने चुनावी नतीजों और मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है। हालांकि, मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप अपने आप में यह साबित नहीं करता कि चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ था। इसके लिए विस्तृत जांच और आधिकारिक निष्कर्ष जरूरी हैं।

पूरे प्रदेश में जांच के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों की जांच के निर्देश दिए जाने और दो दिन के भीतर रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। यदि जांच में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं मिलती हैं, तो यह प्रदेश की चुनावी व्यवस्था के लिए गंभीर विषय होगा। मतदाता पहचान पत्र (EPIC), मतदाता क्रमांक, नाम और अन्य विवरणों का सही मिलान लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियादी आवश्यकता है।

कार्रवाई हुई, लेकिन FIR पर सवाल

संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाए जाने की कार्रवाई के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है और कथित अनियमितता के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होगी या नहीं। केवल पद से हटाना पर्याप्त है या नहीं, यह जांच के निष्कर्षों और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। पूरे मामले में पारदर्शी जांच, अभिलेखों का सत्यापन और जिम्मेदारी निर्धारित करना जरूरी है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता की परीक्षा

कांग्रेस इस प्रकरण को भाजपा की चुनावी जीत और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से जोड़कर पेश कर रही है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची की विसंगतियों को उजागर करने के बाद ही कार्रवाई आगे बढ़ी। दूसरी ओर, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले चुनाव आयोग की विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।

लोकतंत्र में चुनाव की विश्वसनीयता केवल मतदान कराने से नहीं, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता और शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई से भी सुनिश्चित होती है। पीलीभीत का मामला अब इस कसौटी पर चुनाव प्रशासन की जवाबदेही की परीक्षा बन गया है। प्रदेशव्यापी जांच में यदि गड़बड़ियां प्रमाणित होती हैं, तो सुधारात्मक कार्रवाई के साथ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कदम उठाना भी आवश्यक होगा।

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