
भीम प्रकाश शर्मा, जयपुर : राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के पावन अवसर पर एक विशेष शैक्षणिक व वैचारिक कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य नेतृत्व मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी द्वारा किया गया। समारोह में विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. उमा मित्तल विशिष्ट अतिथि के रूप में मुस्तैदी से उपस्थित रहीं।
सकारात्मक मनोविज्ञान से जुड़ी बापू की विचारधारा
विशिष्ट अतिथि प्रो. उमा मित्तल ने गांधीवादी दर्शन के दार्शनिक एवं मनोवैज्ञानिक पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गांधीवादी विचारधारा को समझने में आधुनिक ‘सकारात्मक मनोविज्ञान’ (Positive Psychology) एक बेहद मजबूत दृष्टिकोण है। उन्होंने बापू के सत्याग्रह के सिद्धांत को आत्म-नियमन, गहरी सहानुभूति और रचनात्मक संघर्ष-समाधान की मनोवैज्ञानिक क्षमता से जोड़ते हुए इसकी समकालीन प्रासंगिकता समझाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि अहिंसा, सत्य, करुणा एवं सर्वोदय जैसे मूल्य व्यक्तिगत मानसिक कल्याण और सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।

विद्यार्थियों ने रखे विचार और चलाया स्वच्छता अभियान
विभाग के छात्र-छात्राओं द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का कुशल संचालन स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष की छात्रा अग्रिमा कपूर ने किया। विचार सत्र के दौरान छात्रा आशी मित्तल ने गांधीवादी दर्शन के अंतर्गत आत्म-अनुशासन व भावनात्मक नियंत्रण पर अपने विचार रखे। वहीं, छात्र विजय कुमार अटल ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के सादगीपूर्ण जीवन, देश के प्रति उनके अमूल्य योगदान और २ अक्टूबर को दोनों जयंतियों के एक साथ मनाए जाने के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया।

भाषण सत्र के उपरांत, विभाग परिसर में एक सघन स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिसमें शिक्षकों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर श्रमदान किया। कार्यक्रम के समापन पर विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी ने सभी को सत्य, करुणा, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व के विधिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का प्रेरक संदेश दिया।