127 ग्राम स्वावलंबन कार्यकर्ताओं की तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न, 108 गांवों में चलेगा स्वावलंबन अभियान 2.0

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : दीनदयाल शोध संस्थान (डीआरआई) द्वारा ग्राम स्वावलंबन के कार्यों में जुटे चित्रकूट प्रकल्प के 127 कार्यकर्ताओं के लिए उद्यमिता विद्यापीठ के लोहिया सभागार में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का शुभारंभ भारत रत्न नानाजी देशमुख की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। इसमें संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने ग्राम विकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया।

कार्यक्रम में प्रधान सचिव निखिल मुंडले, संगठन सचिव अभय महाजन, सह संगठन सचिव अनिल अग्रवाल, कोषाध्यक्ष वसंत पंडित, सचिव अपराजिता शुक्ला, मुख्य कार्यपालन अधिकारी अमिताभ वशिष्ठ तथा महाप्रबंधक डॉ. अनिल जायसवाल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कार्यशाला के पहले दिन पुराने कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि गांवों में स्थायी परिवर्तन तभी संभव है, जब ग्रामवासी स्वयं पहल करें और विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। नानाजी देशमुख का मानना था कि जनता के पुरुषार्थ और सहभागिता से किए गए कार्य ही स्थायी परिणाम देते हैं। इस दौरान पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन को ग्राम विकास का वैचारिक आधार बताया गया।

दूसरे दिन कोषाध्यक्ष वसंत पंडित ने स्वावलंबन अभियान 2.0 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नानाजी ने 26 जनवरी 2002 को गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और हराभरा एवं विवादमुक्त गांव की परिकल्पना के साथ अभियान शुरू किया था। अब इसे आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ‘शाइन’ मॉडल के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत चित्रकूट क्षेत्र के 108 राजस्व गांवों में आधार रेखा सर्वेक्षण कर सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक संकेतकों का आकलन किया जाएगा।

समापन सत्र में संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि भारतीय गांवों की सबसे बड़ी शक्ति स्वावलंबन है। समाजशिल्पी दंपति ग्रामीण विकास के कार्यों में उत्प्रेरक की भूमिका निभाते हैं।

सह संगठन सचिव अनिल अग्रवाल ने कहा कि सरकार, समाज और संस्थाओं के सामूहिक प्रयास से ही योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव है। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक मुकेश त्यागी ने कहा कि ग्राम विकास को जमीनी अनुभवों के माध्यम से बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

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