महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों से मिलती है मानवीय मूल्यों और आदर्श नेतृत्व की प्रेरणा : प्रो. कपिल देव मिश्र

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कला संकाय द्वारा महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में ‘भारतीय संस्कृति में महर्षि वाल्मीकि जी का योगदान’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कला संकाय के अधिष्ठाता एवं रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर के पूर्व कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्र ने की। शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

संगोष्ठी में डॉ. कमलेश थापक ने रामायण में चार वाल्मीकियों के उल्लेख तथा महर्षि वाल्मीकि द्वारा बताए गए मनुष्य के चौदह गुणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्श व्यक्तित्व और चरित्र की व्याख्या की।

डॉ. प्रज्ञा मिश्रा ने रामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के जीवन, रचनाशैली, क्रौंच पक्षी की घटना तथा रत्नाकर से आदिकवि बनने की प्रेरणादायक यात्रा पर विचार रखे। उन्होंने सीता, भरत, लक्ष्मण, उर्मिला और हनुमान के चरित्रों की विशेषताओं को बताते हुए कर्तव्यनिष्ठा एवं दृढ़ संकल्प का संदेश दिया।

पूर्व कुलगुरु प्रो. भरत मिश्र ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने करुणा और मानवता की भावना से महाकाव्य की रचना की। भगवान श्रीराम का चरित्र आदर्श पति, भाई, राजा और पिता के रूप में संपूर्ण विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. कपिल देव मिश्र ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के साहित्य में भौतिक एवं पराभौतिक दोनों पक्षों का गहन चिंतन मिलता है। विद्यार्थियों को अपने दोषों का त्याग कर सकारात्मकता अपनानी चाहिए। उन्होंने शोधार्थियों को नियमित अध्ययन, संगोष्ठियों में सहभागिता और शोध-पत्र लेखन के लिए प्रेरित किया।

प्रो. जयशंकर मिश्र ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कन्हैयालाल मिश्र ने किया। संगोष्ठी में प्राध्यापक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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