
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : दीनदयाल शोध संस्थान, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) क्षेत्रीय निदेशालय भोपाल तथा जिला प्रशासन सतना के संयुक्त तत्वावधान में चित्रकूट क्षेत्र के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और मंदाकिनी (पैसुनी) नदी के पुनर्जीवन हेतु एक उच्चस्तरीय वर्चुअल कार्यशाला आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने की तथा समन्वय CPCB भोपाल के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. ए. के. विद्यार्थी द्वारा किया गया।
जीआईएस मॉडलिंग और पवित्र पहाड़ियों का होगा कायाकल्प
कार्यशाला में सतना के कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस. तथा चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग मुख्य रूप से शामिल हुए। तकनीकी सत्र में आईआईटी दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर प्रो. ए.के. गोसाईं ने मंदाकिनी कैचमेंट के लिए जीआईएस (GIS) आधारित जल-सुरक्षा नियोजन का प्रस्ताव रखा। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस प्रो. सी.आर. बाबू ने कामदगिरि, लक्ष्मण पहाड़ी और हनुमान धारा जैसी पवित्र पहाड़ियों के चरणबद्ध वानस्पतिक पुनर्स्थापन की रूपरेखा प्रस्तुत की। वहीं, आईआईटी दिल्ली के प्रो. विवेक कुमार ने पारिस्थितिक गतिविधियों के साथ स्थानीय आजीविका को जोड़ने पर बल दिया।
पिंडरा जलाशय से मिलेगा पानी, अक्टूबर में होगी जमीनी बैठक
बैठक में जल संसाधन विभाग (मप्र) के इंजीनियर-इन-चीफ विनोद कुमार देवड़ा ने जानकारी दी कि पिंडरा रिजर्वायर से 32 MCM पानी छोड़कर मंदाकिनी में निरंतर प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा। सतना कलेक्टर ने बताया कि इस पुनर्जीवन परियोजना को डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) के पांच वर्षीय प्रोस्पेक्टिव प्लान में शामिल कर धनराशि दी जाएगी।

इस महत्वपूर्ण विमर्श में चित्रकूट के डीएफओ पी.के. कटियार, सतना के डीएफओ मयंक चंडीवाल, गंगा बेसिन रीवा के मुख्य अभियंता वी. के. मंडलोई, केंद्रीय भूजल बोर्ड के सदस्य पी.के. त्रिपाठी तथा दीनदयाल शोध संस्थान के कोषाध्यक्ष वसंत पंडित उपस्थित रहे। अभय महाजन के अनुसार, परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए अक्टूबर माह में एक भौतिक (फेस्ड) समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
