बीबीएयू में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर विचार गोष्ठी; ‘हर घर स्वदेशी और हर युवा उद्यमी’ का दिया नारा

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ के हिंदी प्रकोष्ठ द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर एक विशेष विचार गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने की।

समावेशी विकास और ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा
कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में पंडित दीनदयाल जी के ‘अंत्योदय’ और समावेशी विकास के दर्शन को रेखांकित किया। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा करते हुए इसे राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना का मुख्य स्रोत बताया। कार्यक्रम के प्रारंभ में संयोजक डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव ने मंचासीन अतिथियों को अंगवस्त्रम और स्मृति चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया।

भारतीय भाषाओं और स्वदेशी को सशक्त बनाने पर जोर
शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. राजशरण शाही ने ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय का शैक्षणिक चिंतन’ विषय पर बोलते हुए मैकाले की शिक्षा व्यवस्था के दुष्प्रभावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति जहाँ बाजार और शोषण पर टिकी है, वहीं भारतीय संस्कृति जनकल्याण और पोषण पर आधारित है। उन्होंने भारतीय भाषाओं को सशक्त बनाने की वकालत की।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. पवनपुत्र बादल ने ‘वंदे मातरम् : एक सांस्कृतिक पहचान’ विषय पर व्याख्यान देते हुए इसे भारतीय राष्ट्रभाव का प्रतीक बताया। स्वदेशी जागरण मंच के क्षेत्रीय संयोजक अनुपम श्रीवास्तव ने ‘दीनदयाल जी की दृष्टि में स्वदेशी और स्वावलंबन’ विषय पर युवाओं को रोजगार सृजक बनने की प्रेरणा दी और ‘हर घर स्वदेशी और हर युवा उद्यमी’ का लक्ष्य सामने रखा।

इस अवसर पर सभी उपस्थित प्रतिभागियों ने स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की शपथ ली। कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रीति राय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के दौरान प्रो. सनातन नायक, प्रो. बी.एन. दुबे, डॉ. नमिता जैसल, डॉ. रमेश चंद्र नैलवाल और डॉ. संध्या दीक्षित सहित भारी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे ।

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