बीबीएयू में ‘स्वच्छता ही सेवा’ के तहत ‘कबाड़ से जुगाड़’ प्रतियोगिता; अनुपयोगी कबाड़ से छात्रों ने बनाईं कलाकृतियाँ

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ में ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत मंगलवार को ‘कबाड़ से जुगाड़’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अनूठी और रचनात्मक पर्यावरण-अनुकूल पहल का मुख्य उद्देश्य अनुपयोगी एवं कबाड़ सामग्रियों के रचनात्मक व उपयोगी पुनः प्रयोग (Recycling) के माध्यम से विश्वविद्यालय परिवार में पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

रचनात्मक सोच से कबाड़ बना संसाधन
यह पूरा आयोजन विश्वविद्यालय के स्वच्छता प्रभारी डॉ. रवि शंकर वर्मा के कुशल नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में एकत्र किए गए विभिन्न प्रकार के अनुपयोगी कबाड़, जैसे—प्लास्टिक की बोतलें, पुराने टायर, लोहे व लकड़ी के टुकड़े और धातु स्क्रैप का उपयोग किया गया। विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों और सफाई सेवकों ने मिलकर अपनी रचनात्मकता से इन अनुपयोगी वस्तुओं को सुंदर पौधों के गमलों (Plantation Pots) और अन्य आकर्षक सजावटी व उपयोगी सामग्रियों में परिवर्तित कर दिया।

सतत परिसर निर्माण की दिशा में कदम
इस अवसर पर स्वच्छता प्रभारी डॉ. रवि शंकर वर्मा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता का व्यापक अर्थ केवल झाड़ू लगाना नहीं, बल्कि अपशिष्ट पदार्थों का उचित प्रबंधन और अनुपयोगी वस्तुओं का पुनःप्रयोग करना भी है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करती हैं। इस पहल के माध्यम से पूरे विश्वविद्यालय को ‘कम अपशिष्ट, अधिक पुनःप्रयोग’ (Reduce, Reuse, Recycle) की वैज्ञानिक अवधारणा को अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

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