
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार के स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन द्वारा स्थानीय योजना भवन में “एनवायरनमेंटल चैलेंजेज़ एंड आइडियाज़ फ़ॉर अ सस्टेनेबल फ़्यूचर” विषय पर एक उच्चस्तरीय संवादात्मक व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष सत्र का मुख्य विधिक उद्देश्य “विकसित उत्तर प्रदेश 2047” के विज़न के अनुरूप पर्यावरणीय स्थिरता, क्लाइमेट रेजिलिएंस तथा साक्ष्य-आधारित सतत नीति निर्माण को बढ़ावा देना रहा।
शासन और नियोजन में सस्टेनेबिलिटी को शामिल करना अनिवार्य
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, भारत सरकार के पूर्व सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. राजेन हबीब ख्वाजा ने अपने व्यापक प्रशासनिक अनुभवों को साझा करते हुए पर्यावरण संरक्षण को औद्योगिक विकास और सार्वजनिक नीति का अभिन्न अंग बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने क्लाइमेट चेंज, सस्टेनेबल टूरिज्म, नदियों-महासागरों के संरक्षण और जैव विविधता के विधिक लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। लखनऊ विश्वविद्यालय के कला संकाय के डीन प्रो. अरविंद मोहन ने नदी पारिस्थितिकी एवं वैज्ञानिक जल प्रबंधन पर अपना विशेष विधिक संबोधन दिया।
शीर्ष प्रशासनिक कप्तानों ने साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर दिया ज़ोर
कार्यक्रम की विधिक अध्यक्षता कर रहे एसटीसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने सतत विकास के लिए सरकार, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के मध्य मुस्तैद समन्वय की आवश्यकता रेखांकित की। इससे पूर्व, एसटीसी के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी अक्षत वर्मा ने गणमान्य अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया।

इस महत्वपूर्ण व्याख्यान में समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग यादव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेनशर्मा, यूपीडा के एसीईओ श्रीहरि प्रताप शाही तथा नियोजन एवं विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार मुस्तैदी से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सस्टेनेबल डेवलपमेंट सेल के निदेशक अखिलेश गौतम ने सभी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और एलएमए के प्रतिनिधियों के प्रति विधिक आभार व्यक्त किया ।