
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली : उत्तर रेलवे ने अपनी निर्माणाधीन ढांचागत परियोजनाओं में विधिक मानकों के अनुपालन को सुदृढ़ करने तथा रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ी प्रशासनिक पहल की है। इसके अंतर्गत, 2x 25 केवी ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) अपग्रेडेशन कार्यों के संबंध में संरक्षा और गुणवत्ता पर संगोष्ठी-सह-संवाद सत्रों की एक व्यापक श्रृंखला का सफल आयोजन किया गया। इन विशेष शिविरों का मुख्य विधिक ध्येय “संरक्षा पहले • गुणवत्ता हमेशा • कोई शॉर्टकट नहीं” के मूल सिद्धांत को धरातल पर लागू करना रहा।
लखनऊ, मुरादाबाद, अंबाला और जालंधर में जुटे ५५० तकनीकी कप्तान
रेलवे प्रशासन द्वारा अक्टूबर माह के दौरान चार प्रमुख रणनीतिक केंद्रों— जालंधर, अंबाला, मुरादाबाद और लखनऊ पर इन तकनीकी शिविरों का मुस्तैद संचालन सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। इस महाअभियान में कुल 550 प्रतिभागियों ने सक्रिय विधिक सहभागिता दर्ज कराई, जिनमें 42 उच्चाधिकारी, 169 मंडलीय टीआरडी (TRD) तकनीकी कर्मचारी, अंबाला व लखनऊ विद्युतीकरण प्रोजेक्ट यूनिट के 112 प्रोजेक्ट कर्मी तथा 227 अनुबंधित एजेंसियों व ठेकेदारों के कर्मचारी शामिल रहे।
फाउंडेशन कास्टिंग, क्रेन संचालन और पीपीई (PPE) किट पर दिए कड़े निर्देश
विशेषज्ञ सत्रों के दौरान चालू रेलवे ट्रैक के निकट क्रेन, जेसीबी (JCB) और उत्खनन यंत्रों (Excavators) के सुरक्षित विधिक संचालन, सिग्नलिंग व दूरसंचार प्रणालियों (S&T) की सुरक्षा तथा energized ओएचई (OHE) के निकट फीडर वायर इरेक्शन के दौरान बरती जाने वाली सामान्य सावधानियों पर विस्तृत तकनीकी प्रस्तुतियाँ दी गईं।
अभियान के मुख्य फोकस क्षेत्र निम्नलिखित रहे :
- गुणवत्तापरक निर्माण: स्वीकृत तकनीकी ड्राइंग के अनुरूप फाउंडेशन कास्टिंग, मास्ट इरेक्शन, एलाइनमेंट और ग्राउटिंग सुनिश्चित करना।
- कर्मचारी सुरक्षा: जोखिमपूर्ण कार्यों के दौरान व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (PPE Kit) का शत-प्रतिशत उपयोग अनिवार्य करना।
- आपातकालीन तैयारी: प्रतिकूल मौसम में दुर्घटना रिपोर्टिंग, त्वरित बचाव व्यवस्था और क्षेत्रीय विधिक जवाबदेही तय करना।
उत्तर रेलवे ने स्पष्ट विधिक संदेश दिया है कि संरक्षा और गुणवत्ता प्रत्येक रेलकर्मी व अनुबंधित एजेंसी की सामूहिक जिम्मेदारी है, जिससे किसी भी स्तर पर कोई शॉर्टकट या समझौता कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।