यूपी की मंडियों में शुरू हुआ आधुनिक प्रबंधन युग; ११६ नए मंडी सचिवों का IICMRT में ४५ दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शुरू

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : उत्तर प्रदेश की कृषि मंडियों को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और किसान-हितैषी बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक ढांचागत सुधार किया गया है। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के तत्वावधान में सोमवार को नवनियुक्त मंडी सचिवों के 45 दिवसीय विशेष आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ लखनऊ स्थित आईआईसीएमआरटी (IICMRT) में हुआ। इस विशेष प्रशिक्षण के तहत सभी सचिवों को अखिल भारतीय अध्ययन भ्रमण पर भेजा जाएगा, जहाँ वे देश के विभिन्न राज्यों की आधुनिक मंडियों में ई-नाम (e-NAM), मूल्य निर्धारण, ग्रेडिंग और डिजिटल विपणन व्यवस्थाओं का व्यावहारिक अध्ययन करेंगे।

हाफ कैडर के पास है राजस्व, आयकर और रक्षा सेवाओं का पूर्व अनुभव
इस नए प्रशासनिक बैच की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहुआयामी अनुभव है। कार्यभार ग्रहण कर चुके 116 नवचयनित मंडी सचिवों में से 59 यानी लगभग 51 प्रतिशत सचिवों के पास पूर्व शासकीय सेवाओं का कड़ा अनुभव है। विभागवार आंकड़ों के अनुसार, सर्वाधिक 23 सचिव राजस्व विभाग से आए हैं। इसके अतिरिक्त वित्त, लेखा व आयकर क्षेत्र से सात, पंचायती राज व जिला न्यायालय से छह-छह, रक्षा सेवाओं (Indian Army) से पांच, रेलवे व पुलिस विभाग से तीन-तीन तथा बैंकिंग व वन विभाग से दो-दो अनुभवी अधिकारी इस कैडर का हिस्सा बने हैं। शैक्षणिक मोर्चे पर, कुल 126 चयनितों में 84 विज्ञान स्नातक (Science Graduates) हैं, जिनमें रिमोट सेंसिंग, जीआईएस और सिविल इंजीनियरिंग के तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं।

योगी सरकार के सुधारों से योग्यता को मिला विधिक सम्मान: डॉ. एम.के.एस. सुंदरम
सत्र को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव (कृषि) डॉ. एम.के.एस. सुंदरम ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वतंत्र चयन आयोगों के माध्यम से निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाई गई है। यह बैच उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की कड़ी प्रतिस्पर्धी परीक्षा से चुनकर आया है। मंडी परिषद के निदेशक जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि भारत सरकार के विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय (DMI) के विशेषज्ञों के समन्वय से यह प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया गया है। उन्होंने कप्तानों को निर्देश दिए कि मंडियों में जवाबदेही तय कर बिचौलियों पर नकेल कसी जाए और किसानों के विधिक अधिकारों व हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

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