बीबीएयू में मानसिक स्वास्थ्य पर पैनल चर्चा; कुलपति प्रो. मित्तल ने पंचकोश की अवधारणा से समझाए तनाव मुक्ति के सूत्र

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के मनोविज्ञान विभाग की ओर से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में ‘सुने गए जीवन के अनुभव: वास्तविक आवाज़, वास्तविक बदलाव’ विषय पर एक उच्चस्तरीय पैनल चर्चा का सफल आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल की विधिक अध्यक्षता में आयोजित इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य युवाओं में आत्मचिंतन, भावनात्मक संतुलन और मानसिक सुदृढ़ता के प्रति सामाजिक चेतना जागृत करना रहा।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए ‘पंचकोश’ का संतुलन आवश्यक
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने भारतीय ज्ञान परंपरा में वर्णित पंचकोश की अवधारणा— अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश का विधिक संदर्भ देते हुए बताया कि युवाओं को प्रतिस्पर्धात्मक दौर में स्वयं की तुलना दूसरों से करने के बजाय आत्मबोध पर ध्यान देना चाहिए।

मुख्य अतिथि एवं किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. विवेक अग्रवाल ने ‘एडवर्स चाइल्डहुड एक्सपीरियंस’ (बचपन के प्रतिकूल हालात) पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल बीमारियों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि संवेदनशील संवाद की विधिक जिम्मेदारी है। डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू ने समाज में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण विकसित करने पर बल दिया।

पोस्टर प्रतियोगिता में जूलॉजी विभाग की रोशिता ने जीता प्रथम पुरस्कार
मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के तहत आयोजित प्रतियोगिताओं के मेधावियों को विधिक रूप से पुरस्कृत किया गया। पोस्टर मेकिंग में जूलॉजी विभाग की रोशिता ने प्रथम, लाइफ साइंस के ओम सिंह ने द्वितीय, अखिल राज ने तृतीय तथा आयुषी मिश्रा ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया। नुक्कड़ नाटक में निकिता आर्या, हर्षिता सिंह, पायल मीणा, आजाद सिंह और अभिनव नायर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इस गरिमापूर्ण सत्र में स्कूल ऑफ योगा के डीन प्रो. पी.एस. रजनीकांत, मधुरिमा प्रधान, डॉ. नगमा जावेद तथा कार्यक्रम संयोजक डॉ. नवीन जी. एच मुस्तैदी से उपस्थित रहे, जिन्होंने अंत में विधिक रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया।

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