सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक पॉक्सो फैसले का हिंदी अनुवाद जारी; ‘ई-इलाहाबाद उच्च न्यायालय निर्णय पत्रिका’ पर निःशुल्क उपलब्ध

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ/प्रयागराज: ‘ई-बुकलेट प्रारूप में ऐतिहासिक निर्णय’ श्रृंखला के छठे संस्करण के अंतर्गत एक बड़ी विधिक पहल की शुरुआत की गई है। इसके तहत बाल अधिकारों और उनकी डिजिटल सुरक्षा से जुड़े सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक मील का पत्थर माने जाने वाले फैसले ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस एवं अन्य बनाम एस. हरीश एवं अन्य’ का आधिकारिक हिंदी अनुवाद ३० सितंबर २०२६ को लॉन्च किया गया है। यह ई-बुकलेट कानूनी शोधकर्ताओं, वकीलों, न्यायिक अधिकारियों और विधि छात्रों सहित सभी हितधारकों के लिए एक अमूल्य विधिक सामग्री साबित होगी।

अश्लील बाल सामग्री डाउनलोड या स्टोर करना अब गंभीर अपराध
भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की खंडपीठ ने इस ऐतिहासिक मामले में स्पष्ट फैसला सुनाया था। शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस विवादास्पद आदेश को पूरी तरह से पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि बिना ट्रांसमिशन (प्रसारण) के केवल व्यक्तिगत रूप से देखना या स्टोर करना अपराध नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने विधिक रूप से स्पष्ट किया कि भारतीय कानून के तहत अश्लील बाल सामग्री को केवल डाउनलोड करना, देखना या संग्रहीत (स्टोर) करना भी एक गंभीर आपराधिक कृत्य है। अदालत ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए:

  • ‘बाल अश्लीलता’ या ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ के स्थान पर ‘चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लोइटेशन एंड एब्यूज मटेरियल (CSEAM)’ शब्द का प्रयोग किया जाए।
  • स्कूलों में व्यापक यौन शिक्षा (Sex Education), स्वस्थ संबंधों व सहमति के प्रति जागरूकता कार्यक्रम लागू हों।
  • संसद द्वारा पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धारा 15 की उपधारा (1) में आवश्यक संशोधन पर विचार किया जाए।
  • भारत सरकार द्वारा इन सुझावों को धरातल पर उतारने हेतु एक विशेषज्ञ समिति का गठन हो।

चीफ जस्टिस अरुण भंसाली के संरक्षण में हुआ अनुवाद
इस विस्मयकारी एआई (AI) जनित अनुवाद परियोजना का कार्य इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली के विधिक संरक्षण तथा ‘एआई असिस्टेड लीगल ट्रांसलेशन एडवाइजरी, ई-एएचसीआर (e-AHCR) और आईएलआर (ILR) कमेटी’ के सम्मानित मार्गदर्शन में सुवास (SUVAS) सेल, इलाहाबाद व लखनऊ द्वारा सफलतापूर्वक निष्पादित किया गया है। इस समिति का नेतृत्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजीत कुमार तथा सदस्य न्यायाधीशगण— न्यायमूर्ति समीर जैन, न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान एवं न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह द्वारा किया जा रहा है।

इस गौरवशाली अवसर की शोभा न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी ने बढ़ाई, जिन्होंने पूर्व में एक अधिवक्ता के रूप में अदालत में बच्चों के अधिकारों की इस विधिक लड़ाई को सफलतापूर्वक लड़ा था और उन्होंने ही इस महत्वपूर्ण प्रकाशन की भूमिका (फोरवर्ड) लिखी है। यह ई-बुकलेट इलाहाबाद उच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर ‘ई इलाहाबाद उच्च न्यायालय निर्णय पत्रिका (e-AHCR)’ टैब के अंतर्गत आम जनता के लिए पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है।

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