
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, मुंबई : सिनेमा सिर्फ कहानियों को दिखाने का जरिया नहीं, बल्कि हमारे जीवन के सबसे करीबी रिश्तों का आईना भी है। पिता और बच्चे का रिश्ता हमेशा से ही प्यार, उम्मीदों, मतभेदों और मूक त्याग का एक अनूठा संगम रहा है। समय के साथ हिंदी और गुजराती सिनेमा ने इस रिश्ते के कई खूबसूरत रंगों को पर्दे पर उतारा है। यहाँ ऐसी ही 5 बेहतरीन फिल्मों का विवरण दिया जा रहा है, जिन्होंने पिता के किरदार को अमर बना दिया:
1. जिंदगी वन्स मोर (2026) – शेमारूमी
धर्मा प्रोडक्शंस की गुजराती सिनेमा में पहली फिल्म ‘जिंदगी वन्स मोर’ का निर्देशन जयमिन ने किया है। इसमें दिग्गज अभिनेता सिद्धार्थ रांदेरिया ने एक पिता का ऐसा सहज और आत्मीय किरदार निभाया है, जो बेटे को उन्हें सिर्फ पिता नहीं बल्कि एक इंसान के रूप में समझने का मौका देता है।
2. पीकू (2015) – सोनी लिव
इस फिल्म में अमिताभ बच्चन द्वारा निभाया गया ‘भास्कोर बनर्जी’ का सनकी और जिद्दी किरदार आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है। दीपिका पादुकोण (पीकू) के साथ उनकी खट्टी-मीठी नोकझोंक यह दर्शाती है कि करीबी रिश्तों में एक ही समय पर नाराजगी और अगाध प्रेम कैसे सह-अस्तित्व में रह सकते हैं।
3. 102 नॉट आउट (2018) – प्राइम वीडियो
इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर की प्रतिष्ठित जोड़ी को एक साथ देखना है। यहाँ बच्चन ने 102 साल के जिंदादिल पिता और ऋषि कपूर ने उनके 75 साल के रूढ़िवादी बेटे की भूमिका निभाई है, जहाँ पिता अपने बुजुर्ग बेटे को जिंदगी को खुलकर जीने का नजरिया सिखाता है।
4. अंग्रेजी मीडियम (2020) – जियो हॉटस्टार
दिवंगत अभिनेता इरफान खान द्वारा अभिनीत ‘चंपक बंसल’ का किरदार एक आम पिता के असीमित संघर्ष की दास्तान है। अपनी बेटी (राधिका मदान) के विदेश में पढ़ने के सपने को पूरा करने के लिए इरफान ने बिना शब्दों के अपनी आँखों के हाव-भाव से पिता की चिंता और अगाध स्नेह को जीवंत कर दिया था।
5. उड़ान (2010) – जियो हॉटस्टार
यह फिल्म पिता-पुत्र के रिश्ते के एक कठिन और यथार्थवादी पक्ष को उजागर करती है। रोनित रॉय ने एक बेहद सख्त और आक्रामक पिता ‘भैरव सिंह’ की भूमिका को बखूबी जिया है, जो अपने बेटे रजत बरमेचा (रोहन) की लेखक बनने की आजादी और आकांक्षाओं को अपने अनुशासन के तले दबाना चाहता है।