अंगदान को धार्मिक आस्था के विरुद्ध मानने वालों को चाहिए गीता का ज्ञान : डॉ. अतुल मलिकराम

सूर्योदय भारत साचार सेवा, भोपाल : राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम ने अंगदान को लेकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण साझा किया है। राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में देश भर में 18,378 ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुए, लेकिन मध्य प्रदेश का योगदान इसमें काफी सीमित रहा है। राज्य में जनवरी 2018 से जून 2023 के बीच केवल 25 कैडवेरिक डोनेशन दर्ज हुए, जबकि इसी अवधि में तेलंगाना में 883 और तमिलनाडु में 713 डोनेशन हुए।

डॉ. मलिकराम ने कहा कि यह अंतर सिर्फ चिकित्सा सुविधाओं का नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक भ्रांतियों का भी है। कई परिवारों में यह डर रहता है कि अंगदान से अंतिम संस्कार प्रभावित होगा। उन्होंने भगवद्गीता के दूसरे अध्याय का संदर्भ देते हुए समझाया कि श्रीकृष्ण ने शरीर को नश्वर और आत्मा को अविनाशी बताया है। जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र बदलकर नए वस्त्र धारण करता है, वैसे ही आत्मा शरीर बदलती है।

अतः अंगदान को किसी धर्म के विरुद्ध मानने के बजाय इसे जीवन के प्रति करुणा और निःस्वार्थ सेवा के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने महर्षि दधीचि और राजा शिवि के पौराणिक त्याग का उदाहरण देते हुए कहा कि धर्मगुरुओं, चिकित्सकों और सामाजिक संगठनों को मिलकर इस दिशा में जागरूकता बढ़ानी चाहिए।

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