बीबीएयू में राज्य स्तरीय विमर्श : विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए भारतीय ज्ञान प्रणाली और मानसिक कल्याण पर चर्चा

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में 16 सितंबर को द्विदिवसीय राज्य स्तरीय विमर्श कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जो विश्वविद्यालय के मनोदर्पण प्रकोष्ठ और एनसीईआरटी के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में समग्र शिक्षा के संयुक्त निदेशक विवेक नौटियाल, मनोदर्पण प्रकोष्ठ के प्रभारी प्रो. विनोद कुमार शनवाल और एनसीईआरटी के प्रो. प्रभात कुमार मिश्रा ऑनलाइन भागीदारी कर रहे थे।

कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों और शिक्षकों को पौधा, शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। प्रो. मिश्रा ने कार्यक्रम की प्रमुख रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें विभिन्न निष्कर्ष और तथ्य शामिल थे। कुलपति प्रो. मित्तल ने भारतीय और पाश्चात्य दर्शन का तुलनात्मक विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि भारतीय दर्शन प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और प्रकृति के साथ सामंजस्य पर बल देता है, जबकि पश्चिमी आधुनिकता में अधिक उपभोक्तावाद है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की विशेषताओं को रेखांकित करते हुए, व्यक्ति, समाज, और पर्यावरण के बीच संबंध पर प्रकाश डाला।

प्रो. मित्तल ने भारतीय पंचकोश सिद्धांत का उल्लेख किया, जो शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक और आनंदमय विकास को समग्र रूप से समझने का आधार है। उन्होंने शिक्षकों से भारतीय मूल्यों और समग्र शिक्षा को शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने का आह्वान किया।

नौटियाल ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण और व्यक्तित्व विकास पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मनोदर्पण द्वारा संचालित टेली-काउंसलिंग, जागरूकता कार्यक्रम और परामर्श सेवाओं का विवरण दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों की भावनात्मक आवश्यकताओं को समझना और एक सकारात्मक वातावरण सुनिश्चित करना आवश्यक है।

कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से शिक्षक एवं विशेष शिक्षकों ने भाग लिया। समापन पर सभी ने कार्यक्रम की उपयोगिता को सराहा और शिक्षकों तथा अभिभावकों के सहयोग से विद्यार्थियों के समग्र विकास पर बल दिया।

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