
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में 15 सितंबर को हिंदी प्रकोष्ठ की ओर से ‘राजभाषा हिंदी उत्सव-2026’ के अंतर्गत स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपनी स्वरचित कविताओं के माध्यम से हिंदी भाषा की महत्ता, संरक्षण, संवर्धन और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया। इसके साथ ही नारी सशक्तिकरण, दहेज प्रथा, सामाजिक कुरीतियों, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक विषयों को भी कविताओं का आधार बनाया गया। प्रभावशाली शब्दों, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और काव्यात्मक शैली के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

निर्णायक मंडल में समाजशास्त्र विभाग की प्रो. जया श्रीवास्तव और हिंदी विभाग की डॉ. प्रीति राय मौजूद रहीं। प्रो. जया श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों की कविताओं की विषयवस्तु, भावाभिव्यक्ति और प्रस्तुति का विश्लेषण करते हुए रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग और प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि हिंदी के प्रति सम्मान और उसके प्रयोग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर राजभाषा के विकास में सार्थक योगदान दिया जा सकता है।
डॉ. प्रीति राय ने कहा कि सृजन के लिए संवेदनशीलता, निरंतर चिंतन और प्रभावी अभिव्यक्ति आवश्यक है। उन्होंने कविता को भावनाओं के संप्रेषण का सशक्त माध्यम बताते हुए प्रतिभागियों को साहित्यिक सृजन के प्रति सक्रिय रहने के लिए प्रेरित किया।

प्रतियोगिता के परिणाम विषय की प्रासंगिकता, भावाभिव्यक्ति, काव्य की लय और श्रोताओं पर प्रभाव के आधार पर निर्धारित किए जाएंगे। विजेताओं को उत्सव के समापन सत्र में सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. नमिता जैसल और डॉ. रमेश चंद्र नैलवाल ने किया। अंत में डॉ. नमिता जैसल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर हिंदी अनुवाद अधिकारी डॉ. संध्या दीक्षित समेत शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।