
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : गोमती पुस्तक महोत्सव 2026 के दूसरे दिन रविवार को साहित्य, रचनात्मकता, इतिहास, विचार और संगीत से जुड़े विविध कार्यक्रमों ने दर्शकों को आकर्षित किया। लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों से आए 1,200 से अधिक विद्यार्थियों ने कहानी, कला और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लिया। कहानीकार प्रियंका सागर ने प्रॉप्स, कठपुतलियों और गीतों के माध्यम से बच्चों को कहानी की दुनिया से जोड़ा। इसके बाद ड्राइंग प्रतियोगिता, क्ले आर्ट वर्कशॉप और ‘आर्ट ऑफ क्रिएटिंग बुक कवर्स’ जैसी गतिविधियों में बच्चों ने प्रतिभा दिखाई। राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की टीम ने विद्यार्थियों को 7,000 से अधिक निःशुल्क ई-पुस्तकों वाली डिजिटल लाइब्रेरी से भी परिचित कराया।
‘साहित्यिक धरोहरों के वारिस’ सत्र में यशपाल, अमृतलाल नागर और भगवतीचरण वर्मा की साहित्यिक विरासत पर चर्चा हुई। यशपाल की पुत्रवधू मीना यशपाल, अमृतलाल नागर की पोती ऋचा नागर और भगवतीचरण वर्मा के पोते चंद्रशेखर वर्मा ने पारिवारिक स्मृतियां साझा कीं। ऋचा नागर ने अमृतलाल नागर की बच्चों के प्रति आत्मीयता और कहानी कहने की कला को याद किया, जबकि चंद्रशेखर वर्मा ने कहा कि साहित्य ही उनके दादा की वास्तविक विरासत है।

‘अनुभव, विचार और संवाद’ सत्र में लेखक एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पार्थसारथी सेन शर्मा से विशेष बातचीत हुई। उन्होंने अपनी पुस्तकों और लेखन अनुभवों के साथ लखनऊ की बदलती पहचान पर विचार साझा किए। उन्होंने वर्ष 1916 से 2026 तक के लखनऊ को केंद्र में रखकर ऐतिहासिक उपन्यास लिखने की इच्छा जताई। ‘लव इन लखनऊ’ के संदर्भ में उन्होंने साहित्य को युवाओं के भावनात्मक संघर्षों में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का माध्यम बताया। एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच उन्होंने भारतीय भाषाओं की मौलिकता और साहित्यिक संवेदना को समृद्ध करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
‘वीरगाथा डायरी’ में कवि एवं गीतकार डॉ. कृष्ण कुमार सिंह ने पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और 1857 के क्रांतिकारियों की वीरगाथाएं काव्यात्मक अंदाज में प्रस्तुत कीं। मंगल पांडे, बहादुर शाह जफर, नाना साहब, रानी लक्ष्मीबाई और वीर कुँवर सिंह के योगदान के साथ अवध की भूमिका भी रेखांकित की गई।
सांस्कृतिक संध्या में पांच सदस्यीय लाइव बैंड ‘Delhi Metro’ ने हिंदी और अंग्रेजी के लोकप्रिय क्लासिक गीतों को नए अंदाज में प्रस्तुत कर माहौल को संगीतमय बना दिया। साहित्य, इतिहास और संगीत के इस संगम ने दूसरे दिन को यादगार बना दिया।
