बाढ़ प्रभावित बच्चों की पूरी फीस माफ करेगा दीनदयाल शोध संस्थान, चिकित्सा शिविर लगाकर निशुल्क दवाएं वितरित

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : चित्रकूट में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए दीनदयाल शोध संस्थान (डीआरआई) ने राहत के साथ पुनर्वास की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। संस्थान ने सुरेन्द्र पाल ग्रामोदय विद्यालय में अध्ययनरत बाढ़ प्रभावित परिवारों के बच्चों की चालू शैक्षणिक सत्र की पूरी फीस माफ करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित नौ वार्डों के करीब दो हजार बच्चों को समाज के सहयोग से स्कूल बैग और पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

बाढ़ से हुए नुकसान और राहत कार्यों की समीक्षा के लिए डीआरआई के प्रबंध मंडल की आभासी बैठक आयोजित की गई। बैठक का संयोजन प्रधान सचिव निखिल मुंडले ने किया। संस्थान के संपर्क अधिकारी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक सुरेश सोनी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

संगठन सचिव अभय महाजन ने बताया कि चित्रकूट के 16 वार्डों में से नौ वार्ड बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। संस्थान के कुछ प्रकल्प भी प्रभावित हुए। आपदा के दौरान संस्थान के 350 से अधिक कार्यकर्ता राहत कार्यों में जुटे रहे। भोजन के पैकेट और खिचड़ी वितरण के साथ सियाराम कुटीर अन्नपूर्णा के माध्यम से दोनों समय भोजन की व्यवस्था की गई। प्रशासन द्वारा बनाए गए सभी नौ आश्रय स्थलों पर जरूरत के अनुसार राहत सामग्री पहुंचाई गई। घर-घर सर्वेक्षण कर दो हजार से अधिक राहत किट तैयार की गईं, जबकि ‘नेकी की दीवार’ के माध्यम से कपड़ों का वितरण किया गया।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आरोग्यधाम के माध्यम से चिकित्सा शिविर लगाकर निशुल्क दवाएं वितरित की गईं। पशुधन और कृषि को हुए नुकसान को देखते हुए तुलसी कृषि विज्ञान केंद्र, चित्रकूट और कृषि विज्ञान केंद्र, मझगवां द्वारा पशु स्वास्थ्य एवं टीकाकरण शिविर लगाए जा रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक गांवों में पहुंचकर फसलों के नुकसान का आकलन कर रहे हैं तथा किसानों को आगामी रबी सीजन की तैयारियों के संबंध में सलाह दे रहे हैं। क्षतिग्रस्त घरों वाले कृषक परिवारों को तिरपाल भी उपलब्ध कराए गए हैं।

संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पूर्णेन्दु सक्सैना ने कहा कि आपदा प्रबंधन गंभीर विषय है और वर्तमान अनुभव भविष्य की आपदाओं से निपटने में उपयोगी साबित होंगे।

संस्थान के संपर्क अधिकारी सुरेश सोनी ने कहा कि आपदा के समय सामाजिक समरसता के साथ समाज की चिंता करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि करीब दो हजार घरों तथा टाटी आश्रम सहित संतों की कुटियों को हुए नुकसान के पुनर्स्थापन में डीआरआई को समाज और शासन के बीच सेतु की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने तात्कालिक राहत के साथ दीर्घकालिक पुनर्वास योजना बनाने तथा दो से छह माह की निर्धारित अवधि में कार्य पूरा करने और नियमित मूल्यांकन पर जोर दिया।

बैठक में संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारी, प्रबंध मंडल के सदस्य तथा गोंडा, बीड़, नागपुर, दिल्ली और चित्रकूट प्रकल्पों के प्रभारी कार्यकर्ता उपस्थित रहे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी अमिताभ वशिष्ठ ने शांति पाठ के साथ बैठक का समापन किया।

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