
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : प्रेरणास्रोत बाबा नीम करोली जी की कृपा से इण्डियन हेल्पलाइन सोसाइटी (रजि.) द्वारा संचालित सेवा प्रकल्प ‘बृज की रसोई’ ने रविवार को आशियाना क्षेत्र में निःशुल्क पौष्टिक भोजन सेवा आयोजित की। श्री कान्हा जी की छठी के पावन अवसर पर सेवा और समर्पण का संदेश देते हुए जरूरतमंदों को कढ़ी-चावल और बूंदी का महाप्रसाद श्रद्धा एवं आत्मीयता के साथ वितरित किया गया।
संस्था के संजय श्रीवास्तव ने बताया कि महाप्रसाद अकिंचन, असहाय, निराश्रित, जरूरतमंद बच्चों, बुजुर्गों और श्रमिकों को वितरित किया गया। संस्था सदस्य अनिल मूलवानी ने छठी के उपलक्ष्य में मिष्ठान के रूप में बूंदी की व्यवस्था कराई।

इसी अवसर पर संस्था की सदस्य साधना त्रिपाठी ने जरूरतमंदों के बीच केक काटकर अपना जन्मदिन मनाया और उनके साथ खुशियां साझा कीं। अनुराग दुबे ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य कान्हा जी की छठी के उल्लास को जरूरतमंदों की थाली और उनके चेहरों की मुस्कान तक पहुंचाना था।
संस्था के संस्थापक विपिन कुमार शर्मा ने कहा कि सनातन परंपरा में प्रसाद प्रेम, करुणा और सहभागिता का प्रतीक है। जरूरतमंद तक सम्मानपूर्वक भोजन पहुंचाना समानता, बंधुता और मानवीय गरिमा जैसे मूल्यों को व्यवहार में उतारने का प्रयास है। दीपक भुटियानी ने कहा कि ‘बृज की रसोई’ का उद्देश्य केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को सम्मान और अपनत्व का एहसास कराना है।

आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि जब आस्था सेवा से जुड़ती है तो प्रसाद केवल थाली में नहीं, बल्कि जरूरतमंद के चेहरे की मुस्कान में भी दिखाई देता है। सेवा अभियान के सफल संचालन में जालिम सिंह, विजय पाल सिंह, अश्विनी कुमार बाली, संजय श्रीवास्तव, बलवंत सिंह, दीपक भुटियानी, विकास पाण्डेय, आशीष श्रीवास्तव, अनुराग दुबे, सत्यम वर्मा, मुकेश कनौजिया, अखिलेश सिंह, गोविन्द सिंह एवं साधना त्रिपाठी सहित अनेक स्वयंसेवकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

जालिम सिंह ने कहा कि “जहां प्रेम से परोसा गया अन्न महाप्रसाद बन जाए और जरूरतमंद के चेहरे की मुस्कान ही सबसे बड़ी पूजा हो, वहीं सेवा का वास्तविक अर्थ है।”