
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ में महीने भर से चल रहे ‘राजभाषा हिंदी उत्सव–2026’ का बुधवार को भव्य समापन हो गया। समापन सत्र के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश विधान परिषद के माननीय सभापति श्री मानवेन्द्र सिंह रहे। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों को अतिथियों द्वारा आधिकारिक प्रमाण-पत्र, पदक एवं नकद पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया।

साहित्य से आगे बढ़कर तकनीक और रोजगार की भाषा बने हिंदी
मुख्य अतिथि श्री मानवेन्द्र सिंह ने नई पीढ़ी को प्रेरित करते हुए कहा कि हिंदी को केवल अतीत और साहित्य की भाषा तक सीमित न रखकर इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम तकनीक, विज्ञान और डिजिटलाइजेशन से जोड़ना होगा, ताकि यह रोजगारपरक भविष्य की सशक्त भाषा बन सके। उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं सांसद डॉ. अशोक बाजपेई ने देश की आत्मीय चेतना की भाषा के रूप में हिंदी के प्रति गौरव महसूस करने की बात कही और त्रिभाषा सूत्र के तहत एक अतिरिक्त भारतीय भाषा सीखने पर बल दिया।

पुस्तक विमोचन और द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भी समापन
विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने भाषाई विविधता में एकता की महत्ता पर प्रकाश डाला, जबकि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (झांसी) के प्रो. मुन्ना तिवारी ने हिंदी के प्रचार-प्रसार में गैर-हिंदीभाषी विद्वानों के ऐतिहासिक योगदान को याद किया। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक ‘लोकसाहित्य के विविध परिदृश्य’ का गरिमापूर्ण विमोचन भी किया गया।

इस उत्सव के तहत पूरे सितंबर माह में श्रुतिलेख, टिप्पणी एवं प्रारूपण, हिंदी टंकण (टाइपिंग), निबंध तथा स्वरचित कविता पाठ जैसी कई प्रतियोगिताएं आयोजित हुई थीं। कार्यक्रम का औपचारिक स्वागत कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह ने किया, मंच संचालन डॉ. रमेश चंद्र नैलवाल ने संभाला तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन आईक्यूएसी (IQAC) निदेशक प्रो. शिल्पी वर्मा द्वारा दिया गया। इस दौरान हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रामपाल गंगवार व डॉ. नमिता जैसल सहित भारी संख्या में शिक्षक, अधिकारी और विद्यार्थी मुस्तैद रहे।
