
अशोक यादव, लखनऊ : उत्तर प्रदेश में कौशल विकास, औद्योगिक आवश्यकताओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को आपस में जोड़ने के उद्देश्य से रविवार लखनऊ के ताज पैलेस, विभूति खंड, गोमती नगर में पीएम-सेतु उद्योग सम्मेलन-उत्तर प्रदेश सहभागिता का आयोजन किया गया। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई), भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक शिक्षा में उद्योग की भागीदारी को सुदृढ़ करने तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को विश्वस्तरीय उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित करने पर विचार-विमर्श करना रहा।
कार्यक्रम में देश के रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह, भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तथा व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल उपस्थित रहे। इसके अलावा कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) के महानिदेशक दिलीप कुमार, संयुक्त सचिव मानसी सहाय ठाकुर, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय किरण आनंद सहित उद्योग जगत, प्रशिक्षण संस्थानों, शिक्षण संस्थानों एवं शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित हुए।

सम्मेलन में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल), ब्रह्मोस एयरोस्पेस, ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड (टीसीएल), एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (एडब्ल्यूईआईएल), ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (जीआईएल), अशोक लेलैंड, एनएसडीसी, टीसीआईएल और पीटीसी सहित प्रमुख रक्षा एवं विनिर्माण संगठनों के वरिष्ठ नेतृत्व ने भाग लिया। विश्व बैंक, उद्योग संघों और अन्य रणनीतिक हितधारकों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज किसी भी देश के विकास के लिए मानव संसाधन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। भारत को वैश्विक विनिर्माण और प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनाने की दिशा में देश की यात्रा कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। कोई भी देश दुनिया की अत्याधुनिक मशीनें खरीद सकता है, लेकिन जब तक उन्हें कुशलतापूर्वक संचालित करने वाला प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध नहीं होगा, तब तक तकनीक का पूरा लाभ नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति को जनसांख्यिकीय लाभांश तथा उत्पादक लाभांश में परिवर्तित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे हैं। रक्षा विनिर्माण, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन, रोबोटिक्स, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के लिए भविष्य के अनुरूप कुशल कार्यबल आवश्यक है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम-सेतु के माध्यम से सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं, प्रयोगशालाओं, डिजिटल शिक्षण व्यवस्था तथा नवीनतम पाठ्यक्रम से युक्त किया जा रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के विनिर्माण एवं रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में उभरने और रक्षा औद्योगिक गलियारे (डिफेंस कॉरिडोर) की सराहना करते हुए उद्योग जगत से आह्वान किया कि वे पीएम-सेतु को केवल सरकारी योजना न मानकर एक साझा राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखें तथा रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम (डीपीएसयू) इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीएम-सेतु की सफलता का आकलन केवल स्थापित मशीनों से नहीं, बल्कि इससे सृजित रोजगार के अवसरों से होना चाहिए।

भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने कहा कि पीएम-सेतु सरकार, उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच नई साझेदारी का मॉडल प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण और रोजगार के बीच की खाई को पाटना है। उन्होंने उद्योगों से आह्वान किया कि वे केवल सीएसआर (CSR) पहलों तक सीमित न रहकर आईटीआई क्लस्टरों के विकास, शासन और संचालन का सक्रिय स्वामित्व लें तथा आईटीआई की जिम्मेदारी निभाएं।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण, बड़ा बाजार, विशाल युवा आबादी तथा तकनीकी रूप से सक्षम मानव संसाधन उपलब्ध है। उन्होंने सम्मेलन में भाग लेने वाले उद्योगों को राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार उद्योग जगत के साथ मिलकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में पीएम-सेतु के तहत चिन्हित 8 क्लस्टरों (32 आईटीआई) का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें से 7 क्लस्टर अभी उद्योग सहयोग के लिए खुले हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत की जो भी अपेक्षाएं होंगी, सरकार उन्हें पूरा करने का शत-प्रतिशत प्रयास करेगी।
सम्मेलन के दौरान रक्षा और रणनीतिक उद्योगों के प्रतिनिधियों ने एयरोस्पेस सिस्टम, जहाज निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, प्रिसिजन इंजीनियरिंग, रक्षा उत्पादन, उन्नत वेल्डिंग, मेकाट्रॉनिक्स और ड्रोन प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में कुशल तकनीशियनों की बढ़ती मांग को रेखांकित किया।
पीएम-सेतु योजना की मुख्य विशेषताएं:
एक हब आईटीआई और चार स्पोक आईटीआई वाले क्लस्टर में ₹241 करोड़ तक का निवेश आकर्षित किया जा सकता है, जिसमें केंद्र सरकार का 50%, राज्य सरकार का 33% और उद्योग साझेदारों का 17% योगदान होगा।
क्लस्टर संचालन हेतु प्रस्तावित एसपीवी व्यवस्था में एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स (AIP) को 51% स्वामित्व दिया गया है, जबकि केंद्र व राज्य सरकार के पास 24.5-24.5% स्वामित्व रहेगा। वर्तमान में 5 राज्यों के 7 क्लस्टरों में स्वीकृत उद्योग साझेदारी प्रस्ताव ₹1,500 करोड़ से अधिक के निवेश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान युवाओं को सशस्त्र बलों, पुलिस और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में करियर के लिए तैयार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) और लखनऊ छावनी बोर्ड के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत ‘शौर्य अकादमी’ की स्थापना की जाएगी।
कार्यक्रम के अंत में प्रमुख सचिव (व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास) डॉ. हरिओम ने उपस्थित सभी अतिथियों, भारत सरकार के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत एवं शिक्षण संस्थानों के अधिकारियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
