
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ / देहरादून / पिथौरागढ़ / बरेली : भारतीय सेना की ‘सद्भावना’ पहल के तहत, कुमाऊं क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों के बच्चों के लिए पहला ‘राष्ट्रीय एकता दौरा’ (NIT) 15 से 28 अगस्त 2026 तक सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। 15 दिनों के इस दौरे में कुमाऊं के दूर-दराज के सीमावर्ती इलाकों से 20 छात्र और दो शिक्षक शामिल हुए। उन्हें भारत की सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक संस्थानों, सैन्य परंपराओं और तकनीकी प्रगति को जानने-समझने का मौका मिला।

इस दल को पिथौरागढ़ से पंचशूल ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर गौतम पठानिया ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने छात्रों को सीखने के इस अनोखे अवसर का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस दौरे की सबसे खास बात 17 अगस्त 2026 को भारत के राष्ट्रपति के साथ छात्रों की बातचीत थी। यह उन छात्रों के लिए जीवन भर याद रहने वाला अनुभव था, जो पहली बार अपने गांवों से बाहर निकले थे। बाद में उन्होंने राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, कर्तव्य पथ, लाल किला और कई ऐतिहासिक स्मारकों, संग्रहालयों और नेहरू तारामंडल (प्लेनेटेरियम) का दौरा किया। छात्रों ने नेशनल वॉर मेमोरियल में देश के वीर जवानों को श्रद्धांजलि भी दी और भारत के इतिहास, विरासत तथा सशस्त्र बलों के बलिदानों के बारे में गहरी समझ हासिल की।

देहरादून में, छात्रों ने 24 अगस्त 2026 को उत्तराखंड के राज्यपाल से मुलाकात की और प्रतिष्ठित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (RIMC) और फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून का दौरा किया। वहां उन्हें शिक्षा, नेतृत्व, अनुशासन और भारतीय सशस्त्र बलों की कार्य-संस्कृति के बारे में बहुमूल्य जानकारी मिली।

इसके बाद यह दल बरेली गया, जहां उन्होंने 25 अगस्त 2026 को जीओसी, हेडक्वार्टर उत्तर भारत एरिया, लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा AVSM से मुलाकात की और दौरे के अपने अनुभव व मुख्य सीख साझा कीं। फिर दल लखनऊ दर्शन के लिए आगे बढ़ा और 27 अगस्त 2026 को हेडक्वार्टर सूर्या कमांड में उनका स्वागत किया गया। इसके बाद दल मुनस्यारी के लिए रवाना हुआ, जिसके साथ ही इस दौरे का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

कई प्रतिभागियों के लिए यह उनके गांवों से बाहर की पहली यात्रा थी। ‘राष्ट्रीय एकता दौरे’ ने उनके नजरिए को व्यापक बनाया, उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उनमें देशभक्ति व राष्ट्रीय एकता की गहरी भावना को मजबूत किया। इस पहल के सफल आयोजन ने ‘सद्भावना’ कार्यक्रम के ज़रिए दूर-दराज़ के सीमावर्ती इलाकों के युवाओं के सर्वांगीण विकास के प्रति भारतीय सेना की अटूट प्रतिबद्धता को फिर से साबित किया।