एमपी ऑर्गन ट्रांसप्लांट मिशन की ज़रूरत; रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम ने उठाए स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, भोपाल : प्रसिद्ध राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम ने मध्य प्रदेश की वर्तमान स्वास्थ्य अवसंरचना पर सवाल उठाते हुए राज्य में अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) केंद्रों की भारी कमी और उनके विकेंद्रीकरण का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि अंगदान अब केवल संवेदना का विषय नहीं, बल्कि नीतिगत पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही की सबसे बड़ी परीक्षा है।

संकल्प और जमीनी हकीकत में बड़ा फासला
केंद्र सरकार के जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश में 5 लाख से अधिक लोग अंगदान का संकल्प ले चुके हैं, जिसमें सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी जैसी नामचीन हस्तियों का सार्वजनिक समर्थन भी शामिल है। डॉ. अतुल मलिकराम ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संकल्पों के बावजूद वर्ष 2023 में देश भर में हुए 16,542 अंग प्रत्यारोपणों में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी मात्र 1.6 प्रतिशत रही। यद्यपि एम्स भोपाल और जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में सफल कैडेवरिक किडनी व हृदय ट्रांसप्लांट के कुछ सकारात्मक उदाहरण सामने आए हैं, परंतु ये सुविधाएं केवल भोपाल, इंदौर और जबलपुर तक ही सीमित हैं। ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों के अस्पतालों में ब्रेन-डेथ की पहचान करने वाला ढांचा और प्रशिक्षित ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटरों की भारी कमी है।

तेलंगाना के ‘जीवनदान मॉडल’ से सीखे मध्य प्रदेश
रणनीतिकार ने सुझाव दिया कि मध्य प्रदेश को तेलंगाना के सफल ‘जीवनदान मॉडल’ से सीख लेते हुए एक पारदर्शी अंग आवंटन प्रणाली विकसित करनी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से अगले पांच वर्षों के लिए एक समर्पित ‘मध्य प्रदेश ऑर्गन ट्रांसप्लांट मिशन’ बनाने का विधिक आग्रह किया है। इसके तहत हर संभाग में एक सरकारी ट्रांसप्लांट हब बने, जिला अस्पतालों को अंग रिट्रीवल की क्षमता मिले तथा पुलिस, विमानन, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के बीच एक तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू हो। उन्होंने कहा कि शासन को प्रतिवर्ष अधिकृत अस्पतालों, डोनर-रिसिपिएंट डेटा और प्रतीक्षा सूची के परिणाम सार्वजनिक करने चाहिए ताकि प्रशासनिक जवाबदेही तय की जा सके।

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