
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, जयपुर : उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल ने दुर्घटना राहत एवं बचाव व्यवस्था तथा आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखने के लिए शनिवार को दौसा–गंगापुर सिटी रेलखंड के लालसोट रेलवे स्टेशन पर संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की। इसमें रेलवे के विभिन्न विभागों के साथ NDRF, SDRF, सिविल डिफेंस, होम गार्ड, फायर विभाग एवं जिला प्रशासन ने भाग लिया।
मॉक ड्रिल के दौरान लालसोट स्टेशन यार्ड में किलोमीटर संख्या 44/3-4 पर गाड़ी संख्या 09725 के पटरी से उतरने और करीब 15-20 यात्रियों के घायल होने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। दुर्घटना की सूचना मिलते ही रेलवे की निर्धारित दुर्घटना राहत एवं आपदा प्रबंधन व्यवस्था सक्रिय कर दी गई। जयपुर से स्वचालित दुर्घटना राहत एवं बचाव ट्रेन तत्काल रवाना की गई। वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी एवं उनकी टीम भी घटनास्थल पर पहुंची।

इसके अलावा वाणिज्य, परिचालन, इंजीनियरिंग, सिग्नल एवं दूरसंचार, विद्युत, चिकित्सा और आरपीएफ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे। NDRF, SDRF, सिविल डिफेंस, होम गार्ड और फायर विभाग की टीमों ने भी संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया।
मॉक ड्रिल की घोषणा 11:44 बजे की गई। इसके बाद उपलब्ध संसाधनों, निर्धारित कार्यप्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था का व्यावहारिक परीक्षण किया गया। इस दौरान घायलों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने, राहत संसाधनों को घटनास्थल तक पहुंचाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की प्रक्रिया को परखा गया।

अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक रेल दुर्घटना की स्थिति में त्वरित कार्रवाई, प्रभावी राहत-बचाव और बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करना रहा। अधिकारियों ने घटनास्थल तक पहुंचने में लगने वाले समय, संसाधनों की उपलब्धता तथा आपदा राहत एजेंसियों की तत्परता का भी आकलन किया। रेलवे के अनुसार इस तरह की मॉक ड्रिल से आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने और वास्तविक आपात स्थिति में राहत-बचाव कार्यों को अधिक तेज, व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने में मदद मिलती है।
