वंदेमातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर दीनदयाल शोध संस्थान में सामूहिक गायन; राष्ट्रगीत हमारे गौरव का उत्कर्ष

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : राष्ट्रगीत वंदेमातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर उसकी सार्द्धशती के उपलक्ष्य में दीनदयाल शोध संस्थान के दीनदयाल परिसर, आरोग्यधाम परिसर एवं रामनाथ आश्रमशाला परिसर में भव्य सामूहिक गायन कार्यक्रम संपन्न हुआ । कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आनंद कुमार दुबे, शैलेंद्र पांडेय, संस्थान के सह संगठन सचिव अनिल अग्रवाल और सचिव अपराजित शुक्ला द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ ।

मुख्य अतिथि आनंद कुमार दुबे ने कहा कि वंदेमातरम केवल दो शब्द नहीं, बल्कि माँ भारती की साधना का महामंत्र है। यह हमारे आत्मविश्वास और आत्मसम्मान का प्रतीक है, जिसने स्वाधीनता संग्राम में क्रांतिकारियों को ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ने की अदम्य प्रेरणा दी।

उल्लेखनीय है कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 7 नवंबर 1875 को रचित इस ऐतिहासिक गीत को 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया था। वर्ष 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार स्वरबद्ध किया, और 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समकक्ष राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्रदान किया। संस्थान के महाप्रबंधक डॉ. अनिल जायसवाल की उपस्थिति में सभी ने सामूहिक अखंड राष्ट्रगीत का गायन कर प्रतिज्ञा ली। इस जनजागरण अभियान के तहत आज 1490वां सामूहिक गायन संपन्न हुआ।

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