
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, वाराणसी : पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल द्वारा रेल यात्रियों, कर्मचारियों एवं उनके परिजनों को स्वच्छ, सुरक्षित तथा गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। मंडल के सभी 204 स्टेशनों एवं रेल परिसरों में पेयजल सुविधाओं की नियमित जांच और अनुरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है ।

चिकित्सा एवं इंजीनियरिंग विभाग द्वारा संयुक्त रूप से स्टेशनों तथा रेलवे कॉलोनियों में हैंडपंपों, वाटर वेंडिंग मशीनों, पानी की टंकियों, वाटर कूलरों, नलों, फिल्टरों, यूवी (UV) व आरओ (RO) सिस्टम तथा पाइपलाइनों की नियमित जांच व समयबद्ध रखरखाव सुनिश्चित किया जा रहा है।
जल गुणवत्ता की तीन स्तरों पर कड़ी निगरानी:
- अवशिष्ट क्लोरीन परीक्षण: मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षकों (CHI) द्वारा प्रतिदिन क्लोरोस्कोप के माध्यम से क्लोरीन के स्तर की जांच की जाती है।
- बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट: पानी को जीवाणु-मुक्त रखने के लिए प्रत्येक सप्ताह एचआई-मीडिया किट्स (H2 Visuals) से जैविक परीक्षण किए जा रहे हैं।
- रासायनिक विश्लेषण: पेयजल स्रोतों के पानी के नमूनों का रासायनिक विश्लेषण राज्य सरकार की अधिकृत लैब में प्रत्येक छह माह में कराया जाता है।

रेल प्रशासन जन-स्वास्थ्य की दृष्टि से जलजनित संक्रमणों के जोखिम को कम करने और यात्रियों को सुरक्षित वातावरण देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।