वीरांगना रानी दुर्गावती की 502वीं जयंती पर मझगवां में बड़ा उत्सव; राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने समरस समाज का दिया संदेश

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, मझगवां-चित्रकूट: वीरांगना रानी दुर्गावती की 502वीं जयंती के पावन अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा बाल्मीकि परिसर, मझगवां में विविध और भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक समारोह के दौरान कृष्णा देवी विद्यालय की वनवासी बालिकाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में वीरांगना दुर्गावती के जीवन और उनके शौर्य पर आधारित कई मर्मस्पर्शी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन किया।

भेदभाव के कुचक्र को तोड़ने और सनातन संस्कारों पर ज़ोर
समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा कि रानी दुर्गावती ने अपने विस्मयकारी रणकौशल से अपने नाम को सार्थक किया। उन्होंने समाज में समरसता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हमें जातिगत भेदभाव के कुचक्र को तोड़कर छुआछूत की खाई को पाटना होगा और युवा पीढ़ी को पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से दूर रखकर सनातन परंपरा के संस्कार देने होंगे। दीनदयाल शोध संस्थान के उपाध्यक्ष उत्तम बनर्जी ने रानी दुर्गावती को स्वाभिमान व राष्ट्रवाद का प्रतीक बताया। सतना जिला पंचायत की उपाध्यक्ष सुष्मिता सिंह ने रेखांकित किया कि रानी दुर्गावती विश्व की प्रथम महिला वीरांगना थीं जिन्होंने विदेशी आक्रांताओं को धूल चटाई। महाकौशल प्रांत के सह बौद्धिक प्रमुख लक्ष्मीकांत ने जनजातीय कल्याण के लिए भारत रत्न नानाजी देशमुख के पुरुषार्थ को याद किया।

सुंदरकांड पाठ और कृषक गोष्ठी के साथ संपन्न हुआ उत्सव
जयंती समारोह के अंतर्गत सुंदरकांड पाठ, कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से कृषक गोष्ठी तथा भव्य भंडारे का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की रूपरेखा व स्वागत भाषण प्राचार्य गंगाराम यादव ने प्रस्तुत किया तथा संचालन वैज्ञानिक डॉ. पंकज शर्मा ने किया। इस दौरान दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, सह संगठन सचिव अनिल अग्रवाल, सचिव अपराजित शुक्ला, महाप्रबंधक डॉ. अनिल जायसवाल, चूड़ामणि सिंह, रामऔतार आरख, बिरसा मुंडा समिति की अध्यक्ष सोनाबाई, सचिव राजेश त्रिपाठी, मझगवां खंड कार्यवाह विज्ञान चंद्र विश्वकर्मा तथा बिरसिंहपुर खंड कार्यवाह सतेन्द्र त्रिपाठी सहित लगभग 630 कार्यकर्ता, किसान और छात्राएं मुस्तैदी से उपस्थित रहे।

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