
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : मंदाकिनी नदी की विभीषिका के दौरान आपदा की घड़ी में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की प्रशासनिक सीमाओं को भुलाकर मानवता की सेवा करने वाले स्वयंसेवकों के लिए एक गरिमामयी अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। श्री कामदगिरि पीठम द्वारा आयोजित ‘सेवा रत्न सम्मान’ समारोह में बाढ़ राहत कार्यों में अद्भुत और उल्लेखनीय योगदान देने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं व संस्थागत प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।

अनुभव सुन भावुक हुआ वातावरण
समारोह के दौरान जब सेवाभावी स्वयंसेवकों ने अपने जमीनी अनुभव साझा किए, तो पूरा वातावरण भावुक हो उठा। अनुभव-कथन में एक भिक्षुक महिला द्वारा अपनी जमापूंजी से पीड़ितों के लिए फल व केले उपलब्ध कराने तथा सेवाभावी परिवारों द्वारा निरंतर भोजन, कपड़े और दवाएं भेजने के प्रसंगों ने मानवीय संवेदना की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रबुद्ध जनों ने थपथपाई पीठ
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सामाजिक सद्भाव प्रमुख अशोक बेरी ने कहा कि आपदा के समय समाज के बीच जाकर खड़े होना भारतीय सनातन सेवा परंपरा का हिस्सा है। विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने इसे उत्कृष्ट सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण बताया।

पर्यावरण संरक्षण गतिविधि (कानपुर प्रांत) के प्रांत संयोजक डॉ. उमेश कुमार शुक्ला ने राहत कार्यों में युवाओं की ऊर्जा की सराहना की। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक श्री कामदगिरि पीठम प्रमुख द्वार के स्वामी डॉ. मदन गोपाल दास जी महाराज एवं विष्णु दास महाराज ने समाज की इस सामूहिक कृतज्ञता को रेखांकित किया।

प्रशासनिक सहयोग की सराहना
चित्रकूट के उप जिलाधिकारी (SDM) अजय यादव ने शासन-प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए सामाजिक संगठनों का आभार जताया। इस अवसर पर आरएसएस के मझगवा खंड कार्यवाह विज्ञान चंद्र सहित कई संत-महात्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन युवा समाजसेवी गणेश मिश्रा द्वारा किया गया।
