
सतेन्द्र राठौर, नई दिल्ली : वैध पशु परिवहन से जुड़े कारोबारियों ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों को लंबे समय तक रोके जाने, बार-बार दस्तावेजों की जांच और परिवहन किए जा रहे पशुओं को होने वाली परेशानी का मुद्दा उठाया है। दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कारोबारियों ने कहा कि यह समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों में उन्हें ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
एक महिला कारोबारी ने कहा कि वे पिछले करीब दस वर्षों से पशु परिवहन के दौरान विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनके अनुसार, पिछले कुछ महीनों में सरकारी स्तर पर मिले सकारात्मक सहयोग से कुछ राहत मिली है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी कई समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि वैध कारोबारियों और पशु तस्करी में शामिल लोगों के बीच अंतर को समझना जरूरी है और इसी के लिए अधिकारियों तथा आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
12 सितंबर की घटना
कारोबारियों ने 12 सितंबर 2026 की घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि खोरीबाड़ी पेट्रोल पंप के पास उनके वाहनों को कुछ लोगों ने कथित तौर पर रोक दिया। इसके बाद नजदीकी खोरीबाड़ी पुलिस स्टेशन को सूचना दी गई और पुलिस मौके पर पहुंची। उनके अनुसार, पुलिस स्टेशन में दस्तावेजों की जांच करीब तीन घंटे तक चली।
कारोबारियों का कहना है कि उनके रिकॉर्ड में इस घटना से जुड़े कुछ व्यक्तियों के नाम भी दर्ज हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्ति को न्यायालय के निर्णय के बिना दोषी नहीं ठहरा रहे हैं और केवल उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि इस दौरान वाहनों में मौजूद भैंसों को भी लंबे समय तक इंतजार, गर्मी और आवाजाही पर प्रतिबंध जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। कारोबारियों ने सवाल उठाया कि यदि परिवहन वैध दस्तावेजों के साथ हो रहा है, तो दस्तावेजों की जांच के दौरान पशु कल्याण के पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
27 सितंबर को करीब पांच घंटे रोकने का आरोप
कारोबारियों ने 27 सितंबर 2026 को बाराबिसा ओपी में हुई कथित घटना का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, दस्तावेजों की जांच के नाम पर उनके वाहनों को करीब पांच घंटे तक रोका गया। उन्होंने दावा किया कि उस दिन तेज गर्मी और सीधी धूप के कारण वाहनों में मौजूद पशुओं की स्थिति प्रभावित हुई।
कारोबारियों के मुताबिक, उन्हें बताया गया कि दस्तावेजों को उच्च अधिकारियों, यहां तक कि एसपी स्तर तक भेजा गया है। उनका सवाल है कि यदि दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा था, तो इसकी प्रक्रिया पूरी होने तक वाहनों को इतने लंबे समय तक रोकने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
अधिकारियों के प्रशिक्षण और स्पष्ट SOP की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कारोबारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी के खिलाफ व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं है। उनकी मुख्य मांग अधिकारियों और जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रशिक्षण की है।
उन्होंने कहा कि पशु परिवहन से संबंधित दस्तावेजों और लागू नियमों की जानकारी रखने वाले प्रशिक्षित अधिकारियों की व्यवस्था होने से जांच प्रक्रिया अधिक सुचारु हो सकती है। इससे एक ओर अनावश्यक देरी कम होगी, वहीं दूसरी ओर पशुओं को लंबे समय तक गर्मी और ट्रैफिक में खड़े रहने से होने वाली परेशानी से भी बचाया जा सकेगा।
सरकार से मिले सहयोग के लिए जताया आभार
कारोबारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संबंधित सरकारी अधिकारियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पशु परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी समस्याओं को लेकर उनके द्वारा दिए गए प्रतिवेदनों पर सरकारी स्तर से मिले जवाब और सहयोग से उन्हें अपना वैध कारोबार जारी रखने का भरोसा मिला है।
हालांकि, उनका कहना है कि नीति और आधिकारिक स्तर पर दिखाई देने वाली स्पष्टता का प्रभाव जमीनी स्तर पर भी दिखाई देना चाहिए।
लाइसेंस के कथित दुरुपयोग की जांच की मांग
कारोबारियों ने एक अन्य चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी और परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है, जिनसे उन्हें आशंका है कि कुछ लोग कथित रूप से उनके मौजूदा लाइसेंस और वैध कारोबारी ढांचे का इस्तेमाल कर अपना कारोबार संचालित करना चाहते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बिना जांच किसी व्यक्ति या संगठन को अवैध नहीं बता रहे हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से लाइसेंस के कथित दुरुपयोग, अनधिकृत संचालन और कारोबारी पहचान के इस्तेमाल की जांच करने की मांग की।
पहले से दी जाती है अधिकारियों को सूचना
कारोबारियों के अनुसार, पशुओं की लोडिंग के लिए जाने से पहले संबंधित अधिकारियों को ईमेल के माध्यम से सूचना दी जाती है। इसमें दस्तावेज, वाहन की जानकारी और अन्य आवश्यक विवरण उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके बावजूद उनका आरोप है कि जमीनी स्तर पर उन्हें बार-बार दस्तावेज जांच और अन्य प्रक्रियाओं के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कारोबारियों ने अपनी प्रमुख 6 मांगें रखते हुए कहा कि—
- वैध पशु परिवहन को राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनावश्यक अवरोध से बचाया जाए।
- दस्तावेज सत्यापन के लिए स्पष्ट और समयबद्ध SOP लागू की जाए।
- पशुओं को लंबे समय तक गर्मी और ट्रैफिक में अनावश्यक रूप से न रोका जाए।
- अधिकारियों और जमीनी कर्मचारियों को पशु परिवहन संबंधी नियमों का उचित प्रशिक्षण दिया जाए।
- 12 सितंबर और 27 सितंबर की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- लाइसेंस या कारोबारी पहचान के कथित दुरुपयोग की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
कारोबारियों ने कहा कि वे किसी प्राधिकरण या व्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं। उनका उद्देश्य ऐसा तंत्र विकसित करना है जिसमें वैध कारोबार नियमों के अनुसार संचालित हो, पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो और राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनावश्यक देरी या परेशानी से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि उनकी मांग केवल इतनी है कि उन्हें अपना वैध कारोबार शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से करने का अवसर मिले।