यूपी एफएसडीए का बड़ा पर्दाफ़ाश; कम कीमत में खरीदकर मरीजों को एमआरपी पर दवाएं बेच रहे थे 52 नामी अस्पताल

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मरीजों को उचित दरों पर दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग की सचिव एवं आयुक्त डॉ रोशन जैकब के निर्देश पर एक बड़ा राज्यव्यापी औचक निरीक्षण अभियान चलाया है. इस विशेष अभियान के तहत सूबे के 17 जनपदों में 9 राजकीय मेडिकल कॉलेज, 11 निजी मेडिकल कॉलेज और 32 निजी अस्पतालों की फार्मेसियों की सघन जांच की गई, जिसमें दवाओं के मूल्य निर्धारण और विधिक रिकॉर्ड्स में भारी वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताएं उजागर हुई हैं.

फोर्टिस, सर्वोदय और जावित्री अस्पताल समेत कई को नोटिस

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि निर्माता कंपनियों द्वारा दवाओं पर प्रिंटेड एमआरपी (MRP) अत्यधिक ऊँची रखी गई है, जबकि अस्पतालों को वही दवाएं बेहद कम परचेज प्राइस (क्रय मूल्य) पर मिल रही हैं। इसके बावजूद अस्पताल मरीजों से लगभग पूरी एमआरपी वसूल रहे हैं। ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर, 2013 (DPCO) के विधिक उल्लंघन के मामले में फोर्टिस हॉस्पिटल (नोएडा) में बड़ी विसंगतियां मिली हैं।

इसके अतिरिक्त, टेंडर पाल्म (लखनऊ), टी.एस. मेडिकल कॉलेज (लखनऊ), वाराणसी हॉस्पिटल, एपेक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (वाराणसी) तथा सर्वोदय हॉस्पिटल (नोएडा) की फार्मेसियों में लाइसेंस, बिक्री बिल और स्टॉक रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं दर्ज की गई हैं। लखनऊ के जावित्री हॉस्पिटल की थोक फर्म में दवाओं के असुरक्षित भंडारण के कारण विधिक धाराओं के तहत बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई है।

कोल्ड चेन और फार्मासिस्टों की मैपिंग में भी भारी झोल
औषधि महानियंत्रक के निर्देशों के क्रम में हुई इस जांच में क्लाउड नाइन (लखनऊ) और फेलिक्स हॉस्पिटल (नोएडा) में जीवन रक्षक दवाओं के लिए अनिवार्य कोल्ड चेन व तापमान लॉगर के संधारण में बड़ी कमियां पाई गईं, जिससे दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा था। वहीं, वाराणसी हॉस्पिटल में फार्मासिस्टों की भौतिक उपस्थिति और विधिक मैपिंग में विसंगति मिली।

एफएसडीए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दवाओं की कृत्रिम कीमतों और इन गंभीर अनियमितताओं को लेकर दोषी अस्पतालों, सप्लायर्स और दवा निर्माता फर्मों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं। इन सभी के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कठोर दंडात्मक व विधिक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है .

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