विश्व रेबीज दिवस : ‘काटे-चाटे स्वान के दुहू भांति विपरीत’ का मिथक भूलें, 15 मिनट बहते पानी में साबुन से धोएं घाव; सुनील यादव

अशोक यादव, लखनऊ : “काटे चाटे श्वान के दुहु भांति विपरीत” की पुरानी कहावत को पीछे छोड़कर अब आधुनिक चिकित्सा और जागरूकता अपनाने का समय आ गया है। विश्व रेबीज दिवस (World Rabies Day 2026) के अवसर पर आयोजित एक उच्चस्तरीय राष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित करते हुए फार्मासिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि रेबीज एक शत-प्रतिशत जानलेवा लेकिन शत-प्रतिशत टीका-निवारणीय (Preventable) जूनोटिक वायरल बीमारी है। इस वर्ष की आधिकारिक थीम एक साथ मजबूत (‘Stronger Together’) निर्धारित की गई है, जो रेबीज उन्मूलन के लिए मानव स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा और सरकारों के साझा प्रयासों पर बल देती है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (SDG 3.3) से जुड़ी है, जिसका लक्ष्य 2030 तक कुत्तों से होने वाले रेबीज से इंसानों की मौत को शून्य करना है !

पेट में नहीं, अब चमड़े के नीचे हाथों पर लगती है वैक्सीन
सुनील यादव ने समाज में फैले सबसे बड़े भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि अब रेबीज का इंजेक्शन पेट में नहीं लगता। आधुनिक चिकित्सा पद्धति के तहत अब एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) बेहद कम मात्रा में दोनों हाथों के डेल्टॉयड एरिया में चमड़े के ठीक नीचे (Intradermal) दी जाती है। इसके लिए 0, 3, 7 और 28वें दिन का चक्र निर्धारित है, जबकि इम्यूनो-कॉम्प्रोमाइज्ड मरीजों को यह मांस में (Intramuscular) 0, 3, 7, 14 और 28वें दिन दी जाती है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के सभी प्राथमिक (PHCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में यह वैक्सीन पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई गई है।

फ्यूरियस और पैरालिटिक रेबीज: केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर प्रहार
वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा करते हुए उन्होंने बताया कि रेबीज दो प्रकार का होता है—पहला फ्यूरियस रेबीज (Furious Rabies), जिसमें मरीज में अति-सक्रियता, मतिभ्रम और हाइड्रोफोबिया (पानी का डर) जैसे लक्षण दिखते हैं। दूसरा पैरालिटिक रेबीज (Paralytic Rabies), जो कुल मामलों का 20% होता है, जिसमें मांसपेशियां धीरे-धीरे लकवाग्रस्त हो जाती हैं और अंत में मरीज कोमा में चला जाता है। डब्ल्यूएचओ (WHO) के अनुसार, एक बार वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) तक पहुँच गया, तो मृत्यु शत-प्रतिशत निश्चित है।

जानवर के काटते ही तुरंत करें ये काम:

  • 15 मिनट तक धोएं घाव: कुत्ता, बिल्ली या बंदर के काटने, खरोचने या लार के सीधे संपर्क में आने पर तुरंत घाव को 15 मिनट तक बहते पानी में डिटर्जेंट या साबुन से लगातार धोएं।
  • क्या न करें: घाव पर भूलकर भी मिर्च, हल्दी या कोई लेप न लगाएं और न ही कोई पट्टी बांधें । घाव पर टांका लगाने से पूरी तरह बचें।
  • आंकड़े: रेबीज के 99% मामलों के लिए कुत्ते जिम्मेदार हैं, जिनमें से 40% शिकार 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे होते हैं। वैश्विक स्तर पर इससे प्रतिवर्ष लगभग 59,000 मौतें होती हैं।

इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय वेबिनार को चिकित्सा एवं फार्मास्युटिकल क्षेत्र के विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. प्रकाश वी. दीवान, डॉ. हरलोकेश नारायण, प्रो. मनोज यादव, डॉ. विष्णु, डॉ. वंदना, डॉ. अभिषेक, महामंत्री अशोक कुमार, आदेश कृष्ण, अवधेश और अजीत सहित अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया तथा पालतू जानवरों के नियमित टीकाकरण की सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की भावुक अपील की।

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