चित्रकूट में धान की फसल पर कीट और झुलसा रोग का हमला; कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की जरूरी सलाह

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : जिले में धान की फसल गाभा अवस्था में पहुंच रही है, लेकिन लगातार नमी के कारण खेतों में पत्ती लपेटक कीट और झुलसा रोग का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। तुलसी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने और समय पर उचित कीटनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी है।

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. राजेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि पत्ती लपेटक कीट की इल्ली पत्तियों को मोड़कर अंदर से हरा भाग खा जाती है, जिससे पत्तियां सूखने लगती हैं। इसके नियंत्रण के लिए किसान प्रति एकड़ क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल (60 मिली) या इमामेक्टिन बेंजोएट (100 ग्राम) को 150 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

झुलसा रोग से पत्तियों पर लाल-भूरे धब्बे आ रहे हैं, डॉ. नेगी ने सलाह दी कि इस रोग के दिखने पर यूरिया का प्रयोग तुरंत बंद कर दें और जल निकासी का उचित प्रबंध करें। रोग थामने के लिए प्रति एकड़ ट्राइसाइक्लाजोल (120 ग्राम) या प्रॉपिकोनाजोल का छिड़काव करें। बालियों के बेहतर विकास के लिए एनपीके (NPK 18:18:18) का उपयोग करें। वैज्ञानिकों की टीमें ‘कृषि ज्ञान दूतों’ के माध्यम से हर गांव तक यह जरूरी तकनीकी जानकारी पहुंचा रही हैं।

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