बीबीएयू में जैन ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी; कुलपति प्रो. मित्तल ने अपरिग्रह सिद्धांत को बताया सतत विकास का आधार

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) एवं उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ‘जैन ज्ञान परंपरा: भाषा विकास एवं संवर्धन’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल की अध्यक्षता में आयोजित इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य जैन दर्शन के सिद्धांतों, भाषा व साहित्य के ऐतिहासिक योगदान तथा मानवीय मूल्यों के संवर्धन पर गहन अकादमिक विमर्श करना रहा।

संसाधनों का असंयमित उपभोग पर्यावरण के लिए घातक: प्रो. राज कुमार मित्तल
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने जैन दर्शन के अपरिग्रह सिद्धांत को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में असंयमित उपभोग पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संतुलन के लिए एक बड़ी चुनौती है। अपरिग्रह का सिद्धांत हमें प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और सीमित विधिक उपभोग की सीख देता है। उन्होंने सम्यक दृष्टि, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र को व्यक्तित्व निर्माण का अनिवार्य स्तंभ बताया और घोषणा की कि विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान के साथ मिलकर छात्रों के व्यावहारिक विकास हेतु संयुक्त विधिक उपक्रम चलाएगा।

अहिंसा, अनेकांतवाद और भाषा संवर्धन पर विशेषज्ञों ने दिया ज़ोर
मुख्य अतिथि व भोगीलाल लहरचंद इंस्टीट्यूट ऑफ इंडोलॉजी (नई दिल्ली) के प्रो. विजय कुमार जैन ने कहा कि जैन दर्शन का मूल आधार अहिंसा और अनेकांतवाद है, जो दूसरों के दृष्टिकोण का आदर कर समावेशी समाज के निर्माण पर बल देता है। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. अनेकांत कुमार जैन ने ज्ञान व संस्कारों को अगली पीढ़ी तक हस्तांतरित करने में जैन साहित्य की भाषाई उपयोगिता पर प्रकाश डाला। संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. अभय कुमार जैन ने जैन संस्कृति के संरक्षण हेतु जारी शोध गतिविधियों की आख्या प्रस्तुत की, जबकि लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. हरिशंकर मिश्र ने भी सत्र को संबोधित किया।

समारोह के दौरान जैन संस्कृति के संवर्धन में विशिष्ट अवदान देने वाली विभूतियों को विधिक रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का कुशल संयोजन डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव ने किया, जिसमें भारी संख्या में संकायाध्यक्ष, शोधार्थी व छात्र मुस्तैदी से उपस्थित रहे।

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