बीबीएयू में राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन : तथ्यपरक पत्रकारिता और डिजिटल कौशल पर विशेषज्ञों का जोर

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शनिवार 25 जुलाई को जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग और अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय स्तर की मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि के तौर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं डीडी न्यूज के एडिटर एवं संवाददाता अशोक श्रीवास्तव उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अध्यक्ष प्रो. एन.एल. गुप्ता, जनरल सैक्रेटरी प्रो. गीता भट्ट, जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. गोविंद जी. पाण्डेय‌ एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेन्द्र कपूर उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. संजय के. द्विवेदी का विशेष सहयोग रहा‌।

विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को एक समृद्ध, सशक्त एवं विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिए केवल आर्थिक प्रगति ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि देश के नागरिकों का सामाजिक, राजनीतिक एवं आध्यात्मिक रूप से भी सुदृढ़ होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण एक सामूहिक दायित्व है और इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग का सक्रिय सहयोग अपेक्षित है। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि उन्हें सही दिशा, सकारात्मक विचार और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। प्रो. मित्तल ने मीडिया की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा कि लोकतंत्र के चार प्रमुख स्तंभों में मीडिया का महत्वपूर्ण स्थान है, इसलिए समाज में मीडिया के प्रति सकारात्मक एवं संतुलित दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सूचना के इस तीव्र दौर में किसी भी समाचार या जानकारी को साझा करने से पूर्व तथ्यों का सत्यापन  करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भ्रामक सूचनाओं, फर्जी खबरों और गलत नैरेटिव से बचा जा सके तथा समाज में विश्वसनीय, जिम्मेदार और तथ्यपरक संवाद को बढ़ावा मिल सके।

मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने चर्चा के दौरान कहा कि यदि भारत को वास्तविक अर्थों में विकसित और समृद्ध राष्ट्र बनाना है, तो हमें नई पीढ़ी, विशेषकर जेन-ज़ी की सोच, भाषा और कार्यशैली को समझना होगा। उन्होंने कहा कि युवाओं तक प्रभावी ढंग से पहुँचने के लिए संवाद भी उनके अनुरूप होना चाहिए, ताकि वे स्वयं को उससे जुड़ा हुआ महसूस करें। उन्होंने युवाओं को केवल जेन-जी नहीं, बल्कि जेन-वी (Gen V) अर्थात विजन (दूरदृष्टि) वाली पीढ़ी बनाने पर बल देते हुए कहा कि ऐसी पीढ़ी ही विकसित भारत के निर्माण में सार्थक योगदान दे सकती है। श्रीवास्तव ने अपने पत्रकारिता जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज के डिजिटल और तकनीकी युग में निरंतर स्वयं को अद्यतन (अपडेट) रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यम आज परिवर्तन के सबसे प्रभावी साधन बन चुके हैं, इसलिए नई तकनीकों को अपनाकर सकारात्मक, तथ्यपरक और प्रभावशाली संवाद स्थापित करना समय की मांग है। उन्होंने युवाओं का मार्गदर्शन करने, उन्हें सही दिशा देने तथा राष्ट्रहित के प्रति जागरूक बनाने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अध्यक्ष प्रो. एन.एल. गुप्ता ने अपने विचार रखते हुए अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के कार्यों, उद्देश्यों एवं राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महासंघ शिक्षा के भारतीयकरण, शिक्षकों के सर्वांगीण विकास, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन तथा शिक्षा में गुणवत्ता एवं मूल्यपरक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि संगठन शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं शिक्षाविदों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रभावना को सुदृढ़ करने का प्रयास करता है। इसके साथ ही महासंघ समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, संगोष्ठियों एवं जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से शिक्षकों को नवीन शैक्षिक एवं तकनीकी परिवर्तनों से भी जोड़ता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनाते हुए संगठन के उद्देश्यों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने तथा विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की जनरल सैक्रेटरी प्रो. गीता भट्ट ने बताया कि मीडिया समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक सशक्त माध्यम है, जो जनजागरूकता बढ़ाने, सही जानकारी जन-जन तक पहुँचाने तथा राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर समाज का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ भी शिक्षा, राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं मूल्याधारित समाज के निर्माण के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने मीडिया और महासंघ के बीच बेहतर समन्वय एवं संवाद की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि दोनों के साझा प्रयासों से शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े सकारात्मक कार्यों को व्यापक स्तर पर समाज तक पहुँचाया जा सकता है। साथ ही विश्वास व्यक्त किया कि मीडिया और शैक्षिक संगठनों के प्रभावी सहयोग से विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य को और अधिक गति मिलेगी।

इसके अतिरिक्त द्वितीय सत्र में तीन तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें रील्स निर्माण, मोबाइल पत्रकारिता एवं वीडियो ऑप्टिमाइज़ेशन, डिजिटल युग में प्रिंट मीडिया: प्रासंगिकता, विश्वसनीयता एवं प्रभाव और प्रामाणिक और प्रभावशाली कंटेंट निर्माण विषय पर विस्तृत चर्चा की गयी।

तृतीय सत्र में प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल के माध्यम से व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। चतुर्थ सत्र में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के मीडिया प्रकोष्ठ के उद्देश्यों एवं उसकी कार्ययोजना से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया।

समस्त कार्यक्रम के दौरान‌ प्रो. महेंद्र कुमार पाढी, प्रो. रचना गंगवार, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. लोकनाथ सिंह, डॉ. कुंवर सुरेन्द्र बहादुर, डॉ. बबिता पाण्डेय, अन्य शिक्षक एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के सदस्य मौजूद रहे।

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