
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : भारत की लगभग 68 प्रतिशत आबादी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका, स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन (एफ.पी.ओ.), माइक्रो फाइनेंस, सामाजिक उद्यमिता तथा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सी.एस.आर.) जैसे क्षेत्रों के तेजी से विस्तार ने प्रशिक्षित ग्रामीण प्रबंधन एवं कृषि व्यवसाय विशेषज्ञों की मांग को निरंतर बढ़ाया है। ऐसे समय में एम.बी.ए. (ग्रामीण प्रबंधन) तथा एम.बी.ए. (कृषि व्यवसाय प्रबंधन) युवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी और भविष्य उन्मुख पाठ्यक्रम बनकर उभरे हैं।
इन पाठ्यक्रमों की विशेषता यह है कि इनमें केवल कक्षाओं तक सीमित अध्ययन नहीं कराया जाता, बल्कि फील्ड वर्क, सर्वेक्षण, केस स्टडी, प्रोजेक्ट, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप तथा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष कार्य के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया जाता है। यही अनुभव उन्हें रोजगार के लिए अधिक सक्षम बनाता है।
रोजगार के व्यापक अवसर
इन पाठ्यक्रमों के उपरांत विद्यार्थी सरकारी एवं निजी क्षेत्र, बैंक, कृषि व्यवसाय कंपनियों, माइक्रो फाइनेंस संस्थानों, सहकारी संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सी.एस.आर.) परियोजनाओं, कृषि विपणन, खाद्य प्रसंस्करण, शोध संस्थानों तथा अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसियों में आकर्षक अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
विद्यार्थी ग्रामीण प्रबंधक, परियोजना प्रबंधक, शोधकर्ता, विश्लेषक, सलाहकार, सी.एस.आर. अधिकारी, माइक्रो फाइनेंस विशेषज्ञ, प्रशिक्षण विशेषज्ञ, परियोजना समन्वयक, विकास अधिकारी तथा नीति विश्लेषक जैसे पदों पर कार्य कर रहे हैं। अनेक विद्यार्थी उच्च शिक्षा एवं शोध के लिए पीएच.डी. में प्रवेश लेकर विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में अध्यापन भी कर रहे हैं।
स्टार्टअप और सामाजिक उद्यमिता का भी बेहतर विकल्प
आज का युवा केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहता। कृषि आधारित स्टार्टअप, ग्रामीण उद्यमिता, डेयरी, जैविक खेती, मूल्य संवर्धन, ग्रामीण पर्यटन, किसान उत्पादक संगठन, स्वयं सहायता समूहों के साथ कार्य तथा सामाजिक उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी इस पाठ्यक्रम के बाद उत्कृष्ट संभावनाएँ उपलब्ध हैं।
ग्रामोदय विश्वविद्यालय की विशेषता
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में संचालित इन दोनों एम.बी.ए. पाठ्यक्रमों की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामीण जीवन से सीधा जुड़ाव है। प्रत्येक विद्यार्थी सप्ताह में दो दिन गांवों में फील्ड वर्क करता है, जहाँ वह ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संगठनों, एनजीओ, माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं तथा विभिन्न विकास परियोजनाओं के साथ कार्य करते हुए वास्तविक अनुभव प्राप्त करता है। प्रथम वर्ष के उपरांत 45 दिवस का समर प्रशिक्षण तथा द्वितीय वर्ष के बाद 45 दिवस की इंटर्नशिप अनिवार्य है। उत्कृष्ट विद्यार्थियों को पेड इंटर्नशिप के अवसर भी प्राप्त होते हैं।
पाठ्यक्रम में क्या पढ़ाया जाता है ?
इन पाठ्यक्रमों में ग्रामीण विकास, कृषि व्यवसाय प्रबंधन, वित्तीय प्रबंधन, परियोजना प्रबंधन, माइक्रो फाइनेंस, आजीविका संवर्धन, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, डेयरी प्रबंधन, एनजीओ प्रबंधन, उद्यमिता, विपणन, मानव संसाधन प्रबंधन तथा शोध पद्धति जैसे समसामयिक विषयों का अध्ययन कराया जाता है।
कम शुल्क में गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन शिक्षा
जहाँ देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में इन पाठ्यक्रमों की फीस लाखों रुपये है, वहीं महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में लगभग ₹68,000 प्रतिवर्ष के शुल्क पर गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन शिक्षा उपलब्ध है।
प्रवेश कैसे लें ?
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के ग्रामीण विकास एवं व्यवसाय प्रबंधन संकाय के अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) देवेंद्र प्रसाद पाण्डेय के अनुसार इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया सामान्यतः अप्रैल से जून के बीच प्रारम्भ होती है और इच्छुक विद्यार्थी विश्वविद्यालय के समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अन्य विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए संबंधित संस्थानों की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध दिशा-निर्देशों का पालन किया जा सकता है।
यदि आपका लक्ष्य ग्रामीण भारत के विकास में योगदान देने के साथ-साथ एक सम्मानजनक, स्थायी और उज्ज्वल करियर बनाना है, तो एम.बी.ए. (ग्रामीण प्रबंधन) एवं एम.बी.ए. (कृषि व्यवसाय प्रबंधन) आपके लिए उत्कृष्ट विकल्प सिद्ध हो सकते हैं।
