
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के स्कूल ऑफ योग, नेचुरोपैथी एंड कॉग्निटिव स्टडीज (SYNCs) के योग विभाग द्वारा एक दिवसीय ‘ब्रेन पोटेंशियल: द ईईजी वर्कशॉप’ का भव्य आयोजन किया गया। इस तकनीकी कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवा शोधार्थियों को मस्तिष्क के संकेतों, इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (EEG) तथा वास्तविक जीवन में न्यूरोसाइंस के अनुप्रयोगों की व्यावहारिक समझ विकसित करना रहा।
तकनीकी नवाचार संग न्यूरल प्राइवेसी भी ज़रूरी
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए मैगस्टिम ईजीआई, यूएसए (USA) के प्रख्यात न्यूरो-विशेषज्ञ डॉ. सुहास विंचुरकर ने ईईजी, ईआरपी और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से खोपड़ी पर इलेक्ट्रोड लगाकर मस्तिष्क की तरंगों जैसे— डेल्टा (गहरी नींद), थीटा (स्मृति), अल्फा (शांत जागरूकता) और बीटा (सक्रिय सोच) का मिलीसेकंड्स की उच्च सटीकता के साथ लाइव विश्लेषण किया जाता है। उन्होंने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इसके जिम्मेदार उपयोग के साथ न्यूरल प्राइवेसी और नैतिक पहलुओं को समझने की विधिक आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन के साथ आयोजित हुए 4 तकनीकी सत्र
योग विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि इस सुरक्षित न्यूरोइमेजिंग तकनीक का उपयोग आम लोगों के दैनिक जीवन में माइंडफुलनेस, तनाव प्रबंधन और बौद्धिक क्षमता को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। कार्यशाला के दौरान कुल 4 सत्र आयोजित किए गए, जिसमें न्यूरोनल कंडक्शन, एक्शन पोटेंशियल्स और इवेंट-रिलेटेड पोटेंशियल्स पर विस्तृत चर्चा के साथ ही ईईजी का लाइव व्यावहारिक प्रदर्शन (Demonstration) भी प्रस्तुत किया गया।
समारोह के मंच पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एआई की समन्वयक प्रो. बबिता पाण्डेय तथा डॉ. नवीन जी. एच मुस्तैदी से उपस्थित रहे। इस दौरान सभी सफल प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के आधिकारिक विधिक प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। पूरे कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. नरेंद्र सिंह एवं डॉ. कंचन यादव सहित विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।