
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के ऊर्जा एवं पर्यावरण विभाग तथा राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के विद्यार्थियों ने जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन की दिशा में सराहनीय पहल की है। विद्यार्थियों ने जहां चित्रकूट की मंदाकिनी नदी की सहायक झूरी नदी में जल संरक्षण संरचनाओं के प्रभावों का अध्ययन किया, वहीं पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण एवं जागरूकता का संकल्प भी लिया।
ऊर्जा एवं पर्यावरण विभाग में एमएससी पर्यावरण विज्ञान के विद्यार्थियों ने प्राध्यापक डॉ. घनश्याम गुप्ता के नेतृत्व में झूरी नदी पर सतना जिला प्रशासन द्वारा निर्मित वाटरशेड संरचनाओं का अध्ययन किया। मार्च से जून 2026 के दौरान किए गए इस अध्ययन में स्टॉप डैम, चेक डैम, लूज बोल्डर डैम एवं परकोलेशन टैंक जैसी जल संरक्षण संरचनाओं की उपयोगिता और प्रभावों का आकलन किया गया।
अध्ययन में सामने आया कि इन संरचनाओं के माध्यम से नदी में जल संचयन, भूजल स्तर में वृद्धि तथा जैव विविधता के संरक्षण की बेहतर संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। इनसे वर्षा जल को संरक्षित करने और स्थानीय जल संसाधनों को मजबूत बनाने में भी मदद मिलती है।
इस अवसर पर डॉ. घनश्याम गुप्ता ने झूरी नदी के पुनर्जीवन के प्रयासों को चित्रकूट की अन्य नदियों के संरक्षण के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने जल स्रोतों के संरक्षण में सामुदायिक सहभागिता और वैज्ञानिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

इसी क्रम में विश्वविद्यालय की एनएसएस इकाई के स्वयंसेवकों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए अपने जन्मदिन पर विश्वविद्यालय परिसर में कम से कम एक पौधा लगाने का निर्णय लिया। उन्होंने पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास करने की भी प्रतिबद्धता जताई।
विश्वविद्यालय की यह पहल विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी विकसित करने तथा जल एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।