बाढ़ के बाद पशुधन स्वास्थ्य की जांच को चित्रकूट पहुंचा विशेषज्ञ दल, लम्पी रोग नियंत्रण के लिए 30 दिवसीय टीकाकरण अभियान

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : जिले में हाल में हुई अतिवृष्टि और बाढ़ के कारण कई गांवों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए पशुधन में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के तीन सदस्यीय पशु चिकित्सा विशेषज्ञ दल ने चित्रकूट का भ्रमण शुरू किया। दल तीन दिनों तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर पशुओं के स्वास्थ्य की जांच और संक्रामक रोगों की स्थिति का आकलन करेगा। इसकी रिपोर्ट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को प्रस्तुत की जाएगी।

दल में पशुधन पोषण विशेषज्ञ डॉ. दीपेश मिश्रा, पशु औषधि विशेषज्ञ डॉ. अंकुर कसिंह तथा पशु शल्य चिकित्सा एवं विकिरण विशेषज्ञ डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह शामिल हैं। प्रथम दिन कृषि विज्ञान केंद्र, चित्रकूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर.एस. नेगी के साथ विशेषज्ञों ने उन्नाव बन्ना और रामपुरिया पटेर गांवों का भ्रमण किया। पशुपालकों से संपर्क कर पशुओं की जांच की गई और संभावित रोगों के लक्षणों का परीक्षण किया गया।

विशेषज्ञों ने पशुपालकों को खुरपका-मुंहपका, गलघोंटू, ब्लैक क्वार्टर और लम्पी स्किन डिजीज से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराने की सलाह दी। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने, पशुशाला को स्वच्छ एवं सूखा रखने तथा दूषित और ठहरे पानी से पशुओं को दूर रखने पर जोर दिया गया।

इधर, लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम के लिए जिले में 1 से 30 सितंबर तक 30 दिवसीय सघन टीकाकरण अभियान चल रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीमें प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण, उपचार और निगरानी कर रही हैं।

विशेषज्ञों ने पशुपालकों से अपील की कि बुखार, मुंह में छाले, अत्यधिक लार, लंगड़ापन, सूजन या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक अथवा विभागीय टीम को सूचना दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि लम्पी स्किन डिजीज सामान्य परिस्थितियों में पशुओं से मनुष्यों में नहीं फैलता।

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