
अशोक यादव, लखनऊ : 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2018 में आरक्षण विसंगति दूर करने और संशोधित परिणाम जारी करने की मांग को लेकर पिछले 63 दिनों से ईको गार्डन में धरना दे रहे अभ्यर्थियों का आक्रोश सोमवार को सड़कों पर दिखाई दिया। सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थियों ने विधानसभा / लोकभवन के सामने पहुंचकर प्रदर्शन किया और सरकार से तत्काल न्याय दिलाने की मांग की। पिछले सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने आरक्षण विसंगति दूर कर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तीखी नोकझोंक एवं झड़प हुई। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाकर बसों में भरकर ईको गार्डन पहुंचा दिया।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि वर्ष 2018 की इस भर्ती प्रक्रिया में सामान्य वर्ग और ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए समान अर्हता मानक अपनाए गए, जबकि ओबीसी वर्ग को नियमानुसार आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए था। उनका कहना है कि बेसिक शिक्षा नियमावली, आरक्षण नियमावली, एनसीटीई की गाइडलाइन और शासनादेशों की अनदेखी के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपने अधिकारों से वंचित रह गए।
अभ्यर्थियों ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और विधान परिषद की सामाजिक न्याय एवं सद्भाव समिति के समक्ष भी अपना पक्ष और साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। उनका दावा है कि संबंधित संस्थाओं की संस्तुतियों में आरक्षण विसंगति दूर करने तथा परिणाम संशोधित करने की बात कही गई है। अभ्यर्थियों की मांग है कि 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अर्हता के आधार पर पात्र ओबीसी अभ्यर्थियों के परिणाम पर पुनर्विचार कर नियुक्ति दी जाए।
मंत्री की बैठक के बाद भी नहीं निकला समाधान
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह और आशुतोष वर्मा ने बताया कि 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी यह मामला उठाया गया था। बैठक में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाबो देवी, विभाग के प्रमुख सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। अभ्यर्थियों के अनुसार मंत्री ने उनकी मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखने और शासन के निर्देशों से अवगत कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।
‘दस्तक दो अभियान’ के तहत मंत्रियों से लगाई गुहार
तूफान सिंह ने बताया कि 63 दिनों के दौरान अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर, संजय निषाद, स्वतंत्र देव सिंह, आशीष पटेल, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपे। इसके बावजूद समाधान नहीं मिलने पर विधानसभा के सामने प्रदर्शन करना पड़ा।
भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों की स्थिति चिंताजनक
आशुतोष वर्मा ने कहा कि सात दिनों से भूख हड़ताल कर रहे अभ्यर्थियों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। महिला अभ्यर्थी रंजना जायसवाल ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए अभ्यर्थी कठिन परिस्थितियों में भी न्याय की उम्मीद में आंदोलन कर रहे हैं।
धरना प्रभारी नवीन चौधरी ने कहा कि आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि संवैधानिक और आरक्षण संबंधी अधिकारों के लिए है। अभ्यर्थियों ने जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई की भी मांग की।
पुलिस कार्रवाई के बावजूद अभ्यर्थियों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। उनका कहना है कि जब तक शासन की ओर से मांगों पर ठोस एवं लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा। प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए सैकड़ों अभ्यर्थी शामिल रहे।
