दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केन्द्र मझगवां के वैज्ञानिकों ने संभाली कमान, प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्य जारी

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, मझगवां : सतना जिले में पिछले कुछ दिनों से जारी लगातार भारी वर्षा और बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति को देखते हुए दीनदयाल शोध संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) मझगवां के वैज्ञानिक निरंतर ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन का सहयोग कर रहे हैं। बाढ़ और जलभराव के कारण किसानों की फसलों और मवेशियों पर मंडरा रहे खतरे को कम करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा क्षेत्र के कृषकों को निरंतर तकनीकी सलाह और मौसम पूर्वानुमान की जानकारी दी जा रही है। फसलों और पशुओं की सुरक्षा के लिए विशेष परामर्श दे रहे हैं।

लगातार हो रही अतिवृष्टि के कारण खेतों में अत्यधिक जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई है। इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी तुरंत करने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों ने बताया कि खरीफ फसलों की जड़ों को गलने से बचाने के लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था बेहद जरूरी है। पशु स्वास्थ्य पर जोर देते हुए बाढ़ के समय पशुओं में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

वैज्ञानिकों द्वारा पशुपालकों को मवेशियों को सुरक्षित व सूखे स्थानों पर बांधने, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और गलघोटू व लंगड़ी जैसी बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी टीके व दवाइयों के उपयोग की निरंतर सलाह दी जा रही है। जिला प्रशासन के साथ मिलकर राहत शिविरों का संचालन किया जा रहा है।

वैज्ञानिक केवल कृषि और पशुपालन से जुड़ी सलाह तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे धरातल पर उतरकर मानवीय सहायता में भी जुटे हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र मझगवां की टीम जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर ग्राम पंचायत स्तर पर काम कर रही है। अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित बेघर हुए परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए ग्रामीण विद्यालयों और पंचायत भवनों को आश्रय स्थल (राहत शिविर) बनाया गया है। इन आश्रय स्थलों में प्रभावित ग्रामीण जनों के रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करने में कृषि विज्ञान केन्द्र और जिला प्रशासन की टीम दिन-रात जुटी हुई है।

साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञों ने क्षेत्र के सभी कृषकों और ग्रामीणों से अपील की है कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों और कृषि विज्ञान केन्द्र के संदेशों को ध्यान से सुनें। किसी भी आपातकालीन स्थिति में वे तुरंत अपने नजदीकी पंचायत समन्वयक या कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों से संपर्क कर उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

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