
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित गांवों में पशुधन के स्वास्थ्य एवं फसलों की स्थिति का जायजा लेने के उद्देश्य से दीनदयाल शोध संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र, गनिवां, चित्रकूट एवं पशुपालन विभाग, चित्रकूट द्वारा संयुक्त रूप से स्वास्थ्य एवं निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत 01 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक प्रभावित गांवों में पशुधन स्वास्थ्य शिविर, टीकाकरण, उपचार तथा फसल निरीक्षण का कार्य किया जा रहा है।
इसी क्रम में 02 सितंबर को ग्राम तौरा में पशुधन स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। शिविर में कुल 397 पशुओं का टीकाकरण किया गया। इसमें गायों में लम्पी स्किन डिजीज (LSD) से बचाव हेतु तथा भैंसों में खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव हेतु टीकाकरण किया गया। इसके अतिरिक्त ग्राम में दो पशुओं में लम्पी स्किन डिजीज के लक्षण पाए जाने पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक उपचार किया गया।
शिविर में कृषि विज्ञान केंद्र, गनिवां के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. राजेन्द्र सिंह नेगी, वैज्ञानिक पुष्पेन्द्र सिंह दीक्षित एवं रोहित कुमार मिश्रा तथा कार्यकर्ता अभय कुमार एवं राजेन्द्र पटेल उपस्थित रहे। पशुपालन विभाग की ओर से डॉ. वीरेन्द्र सिंह, रामभरोसे वर्मा, श्रवण कुमार एवं रामराज द्वारा पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण एवं उपचार किया गया।

इस दौरान पशुपालकों को संक्रामक रोगों की पहचान एवं रोकथाम, नियमित टीकाकरण, पशुशाला की स्वच्छता तथा रोगग्रस्त पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गई। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा अतिवृष्टि एवं बाढ़ के बाद पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों तथा उचित पशुपालन प्रबंधन के संबंध में तकनीकी सुझाव भी दिए गए।
कृषि विज्ञान केंद्र, गनिवां एवं पशुपालन विभाग द्वारा 01 से 30 सितंबर तक बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित गांवों में पशुधन स्वास्थ्य की स्थिति का लगातार जायजा लिया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से पशुपालकों को समय पर स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण, उपचार एवं तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में फसलों की स्थिति का निरीक्षण कर किसानों को आवश्यक कृषि तकनीकी सलाह भी प्रदान की जाएगी।
