सिविल हॉस्पिटल में निदेशक का समय पर हस्तक्षेप और चिकित्सकीय तत्परता से चोकिंग की शिकार महिला की बची जान

अशोक यादव, लखनऊ : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) चिकित्सालय, लखनऊ में गुरुवार शाम चिकित्सकीय तत्परता, त्वरित निर्णय और टीमवर्क का एक चमत्कारिक सराहनीय उदाहरण देखने को मिला, जब गंभीर अवस्था में लाई गई एक महिला मरीज की जान समय रहते Choking (श्वास नली में बाहरी पदार्थ फँसने) को दूर कर बचाई गई।

गुरुवार शाम लगभग 6:39 बजे चिकित्सालय के निदेशक डॉ. जी.पी. गुप्ता अपने कार्यालय से इमरजेंसी की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक महिला मरीज को स्ट्रेचर पर अत्यंत गंभीर अवस्था में इमरजेंसी की ओर ले जाते देखा। डॉ. गुप्ता ने तत्काल स्वयं मरीज का परीक्षण किया और पाया कि मरीज में नाड़ी तथा श्वास के संकेत नहीं मिल रहे थे।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉ. गुप्ता ने इमरजेंसी चिकित्सा टीम के साथ तत्काल CPR एवं आवश्यक जीवनरक्षक प्रयास प्रारंभ किए। मरीज को शीघ्र ही ICU में स्थानांतरित किया गया। इस दौरान डॉ. गुप्ता स्वयं मरीज के सिरहाने रहकर उसके Airway को Clear करने का लगातार प्रयास करते रहे।

ICU में पहुंचने के बाद तत्काल Endotracheal Intubation की प्रक्रिया की गई। जांच एवं एयरवे मैनेजमेंट के दौरान श्वास नली में फँसे हुए भोजन के अंश तथा प्लास्टिक के पदार्थ को बाहर निकाला गया। एयरवे क्लियर होने के बाद मरीज की श्वसन स्थिति में सुधार हुआ और आवश्यक उपचार प्रदान किया गया।

चिकित्सकों के अनुसार मरीज अब स्थिर एवं स्वस्थ अवस्था में है तथा चिकित्सकीय निगरानी में है।

इस घटना में चिकित्सालय के निदेशक डॉ. जी.पी. गुप्ता की मौके पर तत्काल प्रतिक्रिया, स्वयं मरीज की स्थिति का आकलन करते हुए नेतृत्व प्रदान करना तथा इमरजेंसी एवं ICU टीम की त्वरित कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

डॉ. जी.पी. गुप्ता ने कहा कि Choking एक ऐसी आपातकालीन स्थिति है जिसमें प्रत्येक सेकंड महत्वपूर्ण होता है। यदि समय रहते Airway को Clear कर दिया जाए और आवश्यक CPR एवं जीवनरक्षक उपाय प्रारंभ कर दिए जाएँ, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।
डॉ गुप्ता ने इमरजेंसी एवं ICU की पूरी चिकित्सा टीम के त्वरित एवं समन्वित प्रयासों की सराहना की तथा कहा कि “समय पर सही कदम—किसी का जीवन बचा सकता है।”

चोकिंग –

जरा सी देर हुई तो Choking (चोकिंग) जानलेवा हो सकती है : सुनील यादव
Choking एक जीवन-घातक आपातकालीन स्थिति है, जिसमें भोजन या कोई बाहरी वस्तु श्वास नली (Airway) में फँस जाने से हवा का प्रवाह आंशिक या पूरी तरह रुक जाता है।

मुख्य लक्षण :
अचानक सांस लेने में कठिनाई या सांस बंद होना
बोलने/खांसने में असमर्थता
गले पर हाथ रखना
आवाज न निकलना
चेहरा/होंठ नीले पड़ना
गंभीर स्थिति में बेहोशी

तत्काल प्राथमिक उपचार:
यदि व्यक्ति प्रभावी रूप से खांस पा रहा है, तो उसे खांसने के लिए प्रोत्साहित करें।
यदि खांसी प्रभावी नहीं है और व्यक्ति सचेत है, तो Back Blows और Abdominal Thrusts (Heimlich manoeuvre) दिए जाते हैं।
व्यक्ति बेहोश हो जाए तो तुरंत CPR शुरू करें और आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
मुंह में दिखाई न देने वाली वस्तु को उंगली डालकर निकालने का प्रयास न करें।

महत्वपूर्ण : Choking में हर सेकंड महत्वपूर्ण है। शीघ्र पहचान, सही Airway management और समय पर CPR जीवन बचा सकते हैं।

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