
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार 19 अगस्त को इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल की ओर से ‘विज्ञान संचार, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के माध्यम से 21वीं सदी की समस्याओं का समाधान (Solving 21st Century Problems Using Science Communication, Technology & Innovation)’ विषय पर विशेष वार्ता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर पर्यावरण विज्ञान विभाग, बीबीएयू के विभागाध्यक्ष प्रो. वेंकटेश दत्ता मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त प्रो. महेंद्र कुमार पाढी, प्रो. रचना गंगवार , डॉ. अरविंद सिंह एवं डॉ. लोकनाथ मौजूद रहे।
मुख्य वक्ता प्रो. वेंकटेश दत्ता ने उच्च शिक्षा और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज भी देश की केवल लगभग 5 प्रतिशत आबादी ही उच्च शिक्षा तक पहुंच पाती है। उन्होंने बताया कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं न केवल जनजीवन को प्रभावित करती हैं, बल्कि जल संसाधनों और नदी तंत्र पर भी गहरा प्रभाव डालती हैं। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि कई स्थानों पर लोग निजी उपयोग के लिए नदियों के प्राकृतिक प्रवाह और स्वरूप में हस्तक्षेप करते हैं, जिससे नदी तंत्र का संतुलन प्रभावित होता है।
उन्होंने ‘अच्छे एवं खराब जल’ की अवधारणा को समझाते हुए जल की गुणवत्ता और उसके मानवीय जीवन पर प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने नदी संस्कृति (River Culture) की अवधारणा पर चर्चा करते हुए नदियों के साथ समुदायों के पारंपरिक एवं सामाजिक संबंधों के महत्व को रेखांकित किया। प्रो. दत्ता ने कहा कि किसी क्षेत्र का समुदाय और वहां मौजूद जीव-जंतुओं की गतिविधियां जल की गुणवत्ता के महत्वपूर्ण संकेतक हो सकती हैं तथा इनके माध्यम से यह समझने में सहायता मिलती है कि पानी स्वच्छ है या प्रदूषित।
उन्होंने नदी के क्रॉस-सेक्शन, रिवर कॉन्टिन्यूम (River Continuum) और रिवर कनेक्टिविटी (River Connectivity) जैसे विषयों को भी विस्तार से समझाया। इसके अतिरिक्त उन्होंने फ्लडप्लेन (Floodplain) की संरचना और इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नदी और उसके आसपास के प्राकृतिक क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने नदी तंत्र को समझने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों और जैव विविधता के संकेतों को समझने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

समस्त कार्यक्रम के दौरान शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
