
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, फर्रुखाबाद : अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व/नोडल अधिकारी बाढ़ राहत ने जनपद के बाढ़ क्षेत्रों में जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों के बारे में सर्वसाधारण को सूचित किया है–
जनपद में बाढ़ की वर्तमान स्थिति
गंगा नदी में दिनांक 19 अगस्त 2026 को नरोरा बैराज से 115137 क्यूसेक पानी पास हुआ है, जिससे पांचाल घाट पर पानी का जलस्तर 136.85 मीटर है, जो अभी खतरे के निशान से 137.10 मीटर से 20 मीटर नीचे है, इसी प्रकार रामगंगा नदी में दिनांक 19 अगस्त 2026 को 75445 क्यूसेक पानी पास हुआ है, जिससे रामगंगा सेतु पर भी पानी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है। प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जिलों में जनपद फर्रुखाबाद अतिसंवेदनशील श्रेणी में चिन्हित है ।
जनपद फर्रुखाबाद में बाढ़ से बचाव की तैयारियां
अपर जिलाधिकारी ने कहा कि वर्तमान समय में जनपद की तीन तहसीलों (सदर, अमृतपुर एवं कायमगंज) में 63 गांव, आशिक आबादी एवं कृषि बाढ़ से प्रभावित है। रामगंगा नदी पर एक सुरक्षित तटबंध (कड़कका 7.45 कि0मी0) निर्मित है। जनपद में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू टीम के रिजर्व स्टाफ की पूर्ण व्यवस्था है, इसके साथ ही 01 जून 2026 से कलेक्ट्रेट फतेहगढ़ के कक्ष संख्या 27 (टोल फ्री नंबर 1077, दूरभाष नंबर 05692-235077 एवं मोबाइल नंबर 94544 416457), जिलाधिकारी कैंप कार्यालय (दूरभाष नंबर 05692-234165, 234111) एवं सिंचाई विभाग नलकूप कॉलोनी (दूरभाष नंबर 8005103770) में सातों दिन 24 घंटे बाढ़ नियंत्रण कक्ष संचालित किए गए हैं, जिसमें कर्मचारियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई जाती है। इसके अतिरिक्त राजस्व विभाग द्वारा 52 बाढ़ चौकी (तहसील सदर में 05, तहसील कायमगंज में 15 एवं तहसील अमृतपुर में 33) एवं 24 बाढ़ शरणालय (तहसील सदर में 05, तहसील कायमगंज में 06 एवं तहसील अमृतपुर में 13) संचालित हैं।
उन्होंने बताया कि बाढ़ से प्रभावित होने वाले परिवारों की सुरक्षा एवं बचाव के लिए 24 अस्थाई बाढ़ शरणालय एवं 52 अस्थाई बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं, जिसमें राजस्व विभाग, पंचायती राज विभाग, ग्राम विकास विभाग, चिकित्सा विभाग एवं पशु चिकित्सा विभाग के कार्मिकों की तैनाती की गई है। बाढ़ प्रभावित तहसीलों (सदर, अमृतपुर एवं कायमगंज) में 01-01 मॉडल शरणालय स्थापित किया गया है जहां बच्चों के लिए स्मार्ट क्लासेस, एंटरटेनमेंट रूम एवं खेलने की व्यवस्था की गई है। खोज एवं बचाव कार्य हेतु 191 प्राइवेट नाव/नाविक एवं 53 गोताखोर सेफ्टी किट के साथ उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त तहसीलों में लाइव जैकेट, लाइफ रिंग, सर्च लाइट, सेफ्टी हेलमेट, रेनकोट, मेगाफोन, ड्रैगन लाइट, रस्सा आदि भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। मुख्यालय स्तर पर बाढ़ के दौरान राहत कार्य हेतु इमरजेंसी एसेंशियल रिसोर्स रिजर्व (EERR) किट की भी उपलब्धता की गई है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रो में विभागों द्वारा की जा रही कार्यवाही
जिलाधिकारी डॉ0 अंकुर लाठर के निर्देशन में कृषि विभाग द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में धान की सहनशील प्रजाति आई0आर0 64 सब-1 आदि का भी कृषकों को उपलब्ध कराया गया है, उक्त प्रजाति 14 दिन तक जलभराव की दशा में भी बाढ़ के उपरांत फसल पुनः सही हो जाती है, उक्त धान की प्रजाति 200 एकड़ के क्षेत्रफल में आच्छादित है।
सिंचाई विभाग द्वारा 12.15 करोड़ रुपए की धनराशि से कुल 04 परियोजनाओं में गंगा एवं रामगंगा नदी के कटाव से सुरक्षा हेतु परकोपाइन इस पर एवं स्क्रीन का कार्य कराया गया है।
चिकित्सा विभाग द्वारा बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांव की परिवारों को चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने हेतु 17 मेडिकल टीमें गठित की गई है। बाढ़ प्रभावित ग्रामों में 144 मेडिकल कैंप लगाए गए हैं, जिसमें 8073 मानव उपचार किए गए हैं। 10413 ओ0आर0एस0 पैकेट तथा 9063 क्लोरीन टेबलेट का वितरण किया जा चुका है। पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम एवं आरव की उपलब्धता के साथ निरंतर मेडिकल कैंप लगाई जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त बाढ़ प्रभावित ग्रामों में गर्भवती महिलाओं का भी चिन्नांकन कर लिया गया है।
पशु चिकित्सा विभाग द्वारा बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांव के पशुओं के लिए 06 पशु चिकित्सा टीमें एवं 14 अस्थाई पशु शरणालय स्थापित हैं, 54 पशु शिविर लगाए गए हैं, जिनमें 3273 पशुओं का उपचार एवं 7237 पशुओं का टीकाकरण किया गया है। पशु राहत शिविरों में रहने वाले पशुओं को 120 कुंतल चार (भूसा) का वितरण भी किया जा चुका है।
शिक्षा विभाग द्वारा जनपद के बाढ़ शरणालयों में रह रहे बच्चों की शिक्षा एवं सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देते हुए नियमित कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। पठन-पाठन के साथ नैतिक शिक्षा, खेलकूद एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के मानसिक शैक्षिक और सामाजिक विकास को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जनपद में 02 मॉकड्रिल, बाढ़ राहत चौपाल, 19 स्कूल सेफ्टी प्रोग्राम का आयोजन जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वाधान में एनडीआरफ, एआरएमवाई, फ्लड पीएसी, बाढ़ चौपाल, राजस्व, पुलिस, चिकित्सा, सिंचाई व अन्य संबंधित विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर सफलतापूर्वक संपन्न कराए गए हैं ।
जनपद में बाढ़ प्रभावित ग्रामों में 10621 परिवारों को प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह, जिलाधिकारी एवं जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों द्वारा खाद्यान पैकेट(सूखा) का वितरण जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया जा चुका है । बाढ़ प्रभावित ग्रामों में 661 व्यक्तियों को विस्थापित कर बाढ़ शारणालयों में रखा गया है । जिन्हें प्रतिदिन सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन एवं रात्रि का भोजन दिया जा रहा है । अब तक पके हुये भोजन के 7939 फूड पैकेट का वितरण किया चुका है।

जनपद में जिला प्रशासन द्वारा किये जा रहे राहत कार्य
अपर जिलाधिकारी ने बताया कि गंगा नदी के जलस्तर से जनपद में कुल 50775 जनसंख्या प्रभावित हुयी है, जिसके अन्तर्गत तहसील सदर के 12 गांव में 16915 जनसंख्या, तहसील कायमगंज के 21 गांव में 127005 जनसंख्या एवं तहसील अमृतपुर के 30 गांव में 21160 जनसंख्या सम्मिलित है । बाढ़ के प्रभाव से 21 परिवारों के मकान का कटाव होने पर पूर्ण क्षतिग्रस्त मकानो के परिवारों को पक्के मकान बनाने के लिए 25,20,000 की धनराशि का वितरण गृह अनुदान के रूप में किया जा चुका है । जनपद में बाढ़ से अब तक 2881.8 हेक्टेअर कृषि भूमि प्रभावित हुयी है, बाढ़ का पानी उतरने के पश्चात संबंधित कृषि भूमि के प्रभावित कृषकों की फसलों का राजस्व एवं कृषि विभाग के कार्मिकों से सर्वे कराकर समस्त पात्र कृषकों को कृषि निवेश अनुदान प्रदान किया जायेगा।
जनपद की तीनों तहसीलों (सदर, अमृतपुर एवं कायमगंज) में जिन ग्रामवासियों के आशियानों का कटाव बाढ़ के पानी के बहाव के कारण हो गया है उन्हें जिलाधिकारी डॉ0 अंकुर लाठर के निर्देशन में आवासीय पट्टा प्रदान किये जाने हेतु संबंधित तहसीलों से प्रस्तावित सूची तैयार की जा रही है, इस क्रम में सदर तहसील के ग्राम दिलीप की मड़ैया के 25 परिवारों को आवासीय पट्टे वितरित किये गये है, जिनमें से 21 परिवारों के खाते में पट्टे की धनराशि उपलब्ध करायी जा चुकी है ।
जिलाधिकारी डॉ0 अंकुर लाठर के निर्देशन में जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों की सहायता हेतु प्रतिबद्धता के साथ प्रत्येक संभव प्रयास किया जा रहा है।
