
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा तुलसी जयंती समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. कपिल देव मिश्र ने कहा कि रामचरितमानस मूल्यों का खजाना है। वर्तमान समाज जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, उससे बाहर निकलने का मार्ग तुलसी साहित्य में दिखाई देता है। आज के समय में तुलसी साहित्य की उपयोगिता और भी बढ़ गई है।
प्रो. मिश्र ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा को विशेष महत्व दिया गया है और तुलसी साहित्य भारतीय ज्ञान परंपरा का समृद्ध स्रोत है। इसके अध्ययन से हम अपनी ज्ञान परंपरा को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलगीत का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें गोस्वामी तुलसीदास एवं उनकी माता हुलसी का स्मरण किया गया है। रामचरितमानस की विभिन्न चौपाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनमें जीवन की अनेक समस्याओं के समाधान और मार्गदर्शन के सूत्र निहित हैं।
मुख्य वक्ता एवं हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. ललित कुमार सिंह ने कहा कि कोई व्यक्ति यूं ही रामबोला से तुलसीदास नहीं बन जाता। तुलसीदास जी ने जीवन में अनेक कष्ट सहे, लेकिन कभी हार नहीं मानी और अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस हमारे पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक जीवन के लिए मार्गदर्शक ग्रंथ है और जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान इसमें खोजा जा सकता है। आवश्यकता इसके गंभीर अध्ययन की है।
इस अवसर पर शोध छात्रा भारती कचेर ने तुलसीदास जी की नवधा भक्ति तथा शोध छात्र नितिन कुमार ने तुलसी की भक्ति भावना पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में प्रो. अजय आर. चौरे, डॉ. त्रिभुवन सिंह सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। संचालन अनुपम शुक्ल ने किया।