
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने शनिवार को तुलसी कृषि विज्ञान केंद्र, गनीवा का भ्रमण कर बाढ़ एवं अतिवृष्टि से फसलों और पशुधन को हुई क्षति का जायजा लिया। उन्होंने केंद्र के वैज्ञानिकों से चर्चा कर प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी ली और प्रक्षेत्र में लगी विभिन्न फसलों का निरीक्षण किया।
केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. राजेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि केंद्र के वैज्ञानिकों और कार्यकर्ताओं की टीमें जिले के बाढ़ एवं अतिवृष्टि प्रभावित सभी 160 गांवों में जाकर फसलों की स्थिति का सर्वेक्षण कर रही हैं। अब तक 80 से अधिक गांवों का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार अतिवृष्टि और जलभराव से तिल की फसल को 70 से 80 प्रतिशत, उड़द एवं मूंग को 60 से 70 प्रतिशत, जबकि ज्वार और अरहर की फसल को 50 से 60 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। देर से बोई अथवा रोपी गई धान की फसल भी प्रभावित हुई है।

पशुधन को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र और बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम द्वारा स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। शिविरों में लम्पी रोग से ग्रसित पशुओं का उपचार करने के साथ पशुपालकों को बीमारी से बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं। लम्पी समेत विभिन्न संक्रामक रोगों से बचाव के लिए चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 5,454 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
भ्रमण के दौरान अभय महाजन ने केंद्र के प्रक्षेत्र में लगी विभिन्न फसलों का भी निरीक्षण किया। विशेष रूप से मेड़ एवं कुंड विधि से बोई गई अरहर की फसल को देखा गया।

उन्होंने पाया कि अत्यधिक बारिश के बावजूद इस पद्धति से बोई गई अरहर की फसल में कोई उल्लेखनीय नुकसान नहीं हुआ। यह विधि जलभराव की स्थिति में फसल संरक्षण के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।


