
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : कन्नौज काऊ मिल्क प्लांट को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) को बेचे जाने या उसका स्वामित्व हस्तांतरित किए जाने की बात को शासन ने स्पष्ट रूप से खारिज किया है। प्लांट को केवल 10 वर्ष की अवधि के लिए परिचालन हेतु लीज एवं प्रॉफिट शेयरिंग के आधार पर एनडीडीबी को हस्तगत किया गया है। व्यवस्था का उद्देश्य बंद पड़ी सार्वजनिक परिसंपत्ति का बेहतर उपयोग कर दुग्ध उत्पादकों को लाभ पहुंचाना है।
कन्नौज काऊ मिल्क प्लांट की स्थापित क्षमता एक लाख लीटर प्रतिदिन है। करीब 84.69 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित प्लांट का निर्माण 2019 में पूरा हुआ और दिसंबर 2019 में इसका संचालन शुरू किया गया। हालांकि अपेक्षित दुग्ध संकलन नहीं होने, क्षमता के अनुरूप संचालन न हो पाने तथा वित्तीय रूप से ब्रेक-ईवन हासिल नहीं करने के कारण अक्टूबर 2022 से इसका नियमित संचालन प्रभावित रहा।
दुग्ध विकास विभाग के अनुसार, 25 जून 2025 को प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (पीसीडीएफ) और एनडीडीबी के बीच समझौता ज्ञापन हुआ। इसके तहत प्लांट को 10 वर्ष के लिए एनडीडीबी को परिचालन हेतु लीज पर दिया गया। एनडीडीबी द्वारा प्रारंभिक निवेश के साथ प्लांट का संचालन किया जा रहा है। समझौते में पीसीडीएफ को 1.07 करोड़ रुपये वार्षिक लीज रेंट तथा लाभ में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलने का प्रावधान है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य दुग्ध संकलन व्यवस्था को मजबूत करना, दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को सक्रिय करना तथा पशुपालकों को दूध का उचित और समयबद्ध मूल्य दिलाना है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की भी योजना है।
शासन के अनुसार एनडीडीबी की तकनीकी विशेषज्ञता, प्रबंधकीय दक्षता और डेयरी क्षेत्र के व्यापक अनुभव का उपयोग कर प्लांट को दक्ष एवं व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाया जाएगा। इससे क्षेत्र के दुग्ध उत्पादकों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।