
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में भारतीय भाषा पुस्तक योजना के राज्य स्तरीय क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को द्विदिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। बीबीएयू एवं भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों के विकास, प्रकाशन और प्रसार को लेकर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने की। उन्होंने कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार और पुनरुत्थान के लिए इसे केवल औपचारिक अवसरों तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन, कार्यालयीन कार्य और संवाद में अधिक से अधिक प्रयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि भाषा के प्रति अपनत्व बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

भारतीय भाषाओं को शिक्षा में बढ़ावा
भारतीय भाषा समिति के शैक्षणिक समन्वयक डॉ. चंदन श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय भाषाओं को शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं में सीखने के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं सहित विभिन्न परीक्षाओं का आयोजन भी भारतीय भाषाओं में किया जा रहा है।
पुस्तक प्रकाशन को मिलेगा बल
प्रो. शैलेश मिश्रा ने कहा कि भारतीय भाषा पुस्तक योजना भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि भाषा ज्ञान, संस्कृति और विचारों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।

कार्यशाला में ‘भारतीय भाषा पुस्तक योजना : एक परिचय’ विषय पर विशेष सत्र हुआ। राज्य कार्यान्वयन योजना, विभिन्न राज्यों के प्रोफाइल, योजना के प्रारूपों और समूह कार्य के माध्यम से प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के शिक्षक, बीबीएयू के शिक्षक एवं गैर-शिक्षण अधिकारी मौजूद रहे।


