डीएफसीसीआईएल ने मज़बूत फ्रेट नेटवर्क के विज़न के साथ 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नोएडा : डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड ने नोएडा के सेक्टर-145 स्थित अपने कॉर्पोरेट ऑफ़िस में उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। इस मौके पर डी एफसीसीआईएल के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीण कुमार मुख्य अतिथि थे। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी और उनके साहस व बलिदान को याद किया, जो देश-निर्माण के लिए प्रेरणा देते रहते हैं।

कार्यक्रम में राष्ट्रगीत “वंदे मातरम” का गायन हुआ। नई पहल के तौर पर ट्रैक रिकॉर्डिंग कार, OHE रिकॉर्डिंग कार और ब्रिज इंस्पेक्शन व्हीकल लॉन्च किए गए। ये एडवांस्ड इंस्पेक्शन एसेट्स डीएफसी नेटवर्क में इंफ्रास्ट्रक्चर की निगरानी और रखरखाव को काफ़ी मज़बूत करेंगे। साथ ही, ये डीएफसीसीआईएल के ‘प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस’ (संभावित खराबी का पहले से पता लगाकर रखरखाव) की ओर बढ़ने की दिशा में एक अहम कदम हैं, जिससे एसेट की विश्वसनीयता, सुरक्षा और ऑपरेशनल क्षमता बेहतर होगी।

इस मौके पर डीएफसीसीआईएल की अपडेटेड हिस्ट्री बुक, कॉफ़ी टेबल बुक, CTP-14 पर किताब, लैंड मैनुअल और हिंदी MOP (प्रक्रिया मैनुअल) भी जारी किए गए। पूरे डीएफसी नेटवर्क के चालू होने का जश्न मनाने के लिए इंडिया पोस्ट द्वारा जारी एक यादगार डाक टिकट का भी अनावरण किया गया, जो भारत के माल ढुलाई (फ्रेट ट्रांसपोर्टेशन) के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है।

ग्रीन और टेक्नोलॉजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का उद्घाटन

कॉर्पोरेट ऑफ़िस कॉम्प्लेक्स में एक नर्सरी और सोलर सिस्टम का उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही मियावाकी प्लांटेशन मेथड पर आधारित ‘आनंद वन’, ‘उन्नति उद्यान’, ‘हर्बल गार्डन’ और ‘अमृत वाटिका’ का भी उद्घाटन हुआ। ‘एक्सपीरियंस सेंटर’ और ‘बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम’ का भी उद्घाटन किया गया। ये पहल ग्रीन डेवलपमेंट को बढ़ावा देंगी और काम करने की जगह के माहौल को आधुनिक और बेहतर बनाने में योगदान देंगी।

डीएफसी नेटवर्क की उपलब्धियां

साल 2025-26 में कई अहम उपलब्धियां हासिल हुईं। 31 मार्च 2026 को वैतरणा-JNPT सेक्शन के चालू होने के साथ ही, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) नेटवर्क पूरी तरह से काम करने लगा। DFC नेटवर्क अब देश भर में ज़रूरी सामान की सप्लाई और माल ढुलाई को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

साल 2025-26 के दौरान कुल 1,47,993 मालगाड़ियां चलाई गईं, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 14 प्रतिशत ज़्यादा थीं। रोज़ाना चलने वाली ट्रेनों की औसत संख्या 356 से बढ़कर 406 हो गई, जबकि एक दिन में ज़्यादा से ज़्यादा 460 ट्रेनें चलने का रिकॉर्ड बना। भारतीय रेलवे नेटवर्क में DFC की हिस्सेदारी सिर्फ़ 4 प्रतिशत है, लेकिन यह देश के कुल रेल माल ढुलाई का 14 प्रतिशत हिस्सा ढोता है। पूरे नेटवर्क में भरोसेमंद सेवा, उपलब्धता, सुरक्षा, रफ़्तार, क्षमता और ग्राहकों की संतुष्टि को बेहतर बनाने पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है।

टेक्नोलॉजी और रिसर्च पर फ़ोकस

रखरखाव और कामकाज की प्रक्रियाओं में टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल से ‘प्रिवेंटिव’ (समस्या होने से पहले रखरखाव) से ‘प्रेडिक्टिव’ (समस्या का पहले से अनुमान लगाकर रखरखाव) रखरखाव और ‘रिएक्टिव’ (समस्या होने पर प्रतिक्रिया) से ‘डेटा-आधारित’ फ़ैसले लेने की ओर बदलाव आ रहा है। जून 2026 में हुए इंटरनेशनल हेवी हॉल सेमिनार में दुनिया भर के एक्सपर्ट्स ने जानकारी, बेहतरीन तौर-तरीके और नई खोजें साझा कीं। इस पहल ने हेवी-हॉल ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में DFCCIL की “सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस” (उत्कृष्टता केंद्र) के तौर पर स्थिति को और मज़बूत किया।

टेक्नोलॉजी के आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए IIT रुड़की, IISc बेंगलुरु, मोनाश यूनिवर्सिटी, ICFAI फ़ाउंडेशन फ़ॉर हायर एजुकेशन और L2M रेल के साथ पार्टनरशिप की गई है। इन सहयोगों से टूटी हुई रेल का पता लगाने, मशीन विज़न इंस्पेक्शन, व्हील-रेल इंटरफ़ेस, हेवी-हॉल ऑपरेशन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में एडवांस्ड रिसर्च में तेज़ी आई है।

कार्गो टर्मिनल और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास

DFC को गति शक्ति कार्गो टर्मिनल, प्राइवेट साइडिंग, इंडस्ट्रियल और पोर्ट कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स हब के ज़रिए भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के साथ और बेहतर ढंग से जोड़ा जा रहा है। अब तक सात गति शक्ति कार्गो टर्मिनल चालू किए जा चुके हैं।
पिछले साल DFC नेटवर्क पर कई अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे किए गए। इनमें DDU, न्यू कानपुर, पालनपुर और न्यू अटेली में क्रू के लिए सुविधाएं, अजमेर और मकरपुरा में ट्रैक मशीन डिपो, और 20 रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) के साथ-साथ कनेक्टिविटी से जुड़े अन्य प्रोजेक्ट शामिल हैं।

इसके अलावा, DFCCIL को FIDIC 2026 प्रोजेक्ट अवार्ड्स की “मेगा प्रोजेक्ट्स” कैटेगरी में फाइनलिस्ट के तौर पर चुना गया है। इस कैटेगरी में फाइनल तक पहुंचने वाला यह एकमात्र भारतीय प्रोजेक्ट है। यह पहचान सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर में DFCCIL के योगदान और इसके सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय असर के लिए वैश्विक सराहना को दर्शाती है।

सुरक्षा और जन रक्षक पहल

ऑपरेशन्स में सुरक्षा सबसे ज़्यादा ज़रूरी बनी हुई है। सुरक्षा से ऊपर किसी भी ऑपरेशनल लक्ष्य, समय-सीमा या ज़रूरत को नहीं रखा जाता है। रेल मंत्रालय ने DFCCIL की “जन रक्षक पहल” की तारीफ़ की है और सभी ज़ोनल रेलवे को सलाह दी है कि वे इस पहल का अध्ययन करें और अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इसे लागू करने पर विचार करें।

हरित और टिकाऊ विकास पर फ़ोकस

यह संस्था रिन्यूएबल एनर्जी, सोलर पावर, जल संरक्षण, पेड़-पौधे लगाने और संसाधनों के कुशल इस्तेमाल के ज़रिए एक ज़्यादा हरित और टिकाऊ DFC विकसित करने पर भी ध्यान दे रही है। टेक्नोलॉजी, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधनों का बेहतर तालमेल ऑपरेशनल क्षमता और लंबे समय के विकास को मज़बूत बनाने में मदद कर रहा है।

इस कार्यक्रम का समापन अधिकारियों और कर्मचारियों, कॉन्ट्रैक्टरों, सलाहकारों, सप्लायरों, तकनीकी साझेदारों, भारतीय रेलवे के साथियों और अन्य हितधारकों के योगदान की सराहना के साथ हुआ। संस्था ने “विकसित भारत” के विज़न में योगदान देते हुए सुरक्षा, तकनीकी आधुनिकीकरण, लगातार सुधार और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

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